रांची, 1 अप्रैल 2026: राजधानी रांची में कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की भारी किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय को बुरी तरह झकझोर दिया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने से गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। बड़े होटल अब डीजल भट्टियों का सहारा ले रहे हैं, जबकि छोटे ढाबे, ठेले और रेस्टोरेंट कोयला-लकड़ी पर खाना बना रहे हैं। इससे कोयले की मांग बढ़ने के साथ-साथ उसकी कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
होटल संचालकों के अनुसार, कुछ दिन पहले तक एक सीमेंट बोरा कोयला 200-220 रुपये में मिल जाता था, लेकिन अब यह 260-280 रुपये या उससे भी ज्यादा में बिक रहा है। कुछ जगहों पर कालाबाजारी के चलते कीमत 300 रुपये तक पहुंच गई है। बड़े व्यापारी स्टॉक करके छोटे व्यवसायियों को महंगे दाम पर कोयला बेच रहे हैं, जिससे लागत में 15-20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है।
गैस न मिलने के कारण कई रेस्टोरेंटों ने मेन्यू छोटा कर दिया है। बिरयानी, लिट्टी-चोखा जैसी लोकप्रिय डिशेज हटा दी गई हैं। होम डिलीवरी सेवाएं बंद हो गई हैं, जिससे ऑनलाइन ऑर्डरों में भारी कमी आई है। खाना बनने में ज्यादा समय लग रहा है, ग्राहक नाराज हो रहे हैं और कुछ जगहों पर भीड़ भी घट गई है।
छोटे ठेले-खोमचे वाले और फास्ट फूड वाले सबसे ज्यादा परेशान हैं। कई को दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं या कर्मचारियों को छुट्टी देनी पड़ रही है। झारखंड बार एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन और चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्यों ने रांची डीसी से मुलाकात कर तत्काल कमर्शियल गैस आपूर्ति बहाल करने, कोयले की कालाबाजारी रोकने और पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया सरल बनाने की मांग की है।
व्यवसायियों का कहना है कि पीएनजी एक अच्छा विकल्प है, लेकिन उच्च सिक्योरिटी डिपॉजिट और जटिल प्रक्रिया के कारण छोटे लोग इसे नहीं अपना पा रहे। अगर सरकार इसकी सुविधा सस्ती और आसान बनाए तो एलपीजी पर निर्भरता कम हो सकती है।
चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा, “गैस संकट से कारोबार थम रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे तो कई होटल अस्थायी रूप से बंद होने की नौबत आ जाएगी। इससे रोजगार भी प्रभावित होगा।”
यह संकट मार्च 2026 के मध्य से गहराया है और अभी भी जारी है। झारखंड के अन्य शहरों जैसे गिरिडीह और जमशेदपुर में भी इसी तरह की समस्या देखी जा रही है। प्रशासन से अपील है कि जल्द से जल्द कमर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि शहर का खान-पान कारोबार सामान्य हो सके।