मिडिल ईस्ट तनाव का असर: कोयला भी हुआ महंगा! कोल इंडिया ने 0.24% बढ़ाई कीमतें, 1 अप्रैल 2026 से लागू

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रांची/धनबाद, 20 मार्च 2026: वैश्विक ऊर्जा बाजार में मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कोयला क्षेत्र पर साफ दिखाई दे रहा है। ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के कारण तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित होने से कई देशों में बिजली उत्पादन के लिए गैस की जगह कोयले की ओर रुख किया जा रहा है। इसी वैश्विक मांग वृद्धि के बीच कोल इंडिया लिमिटेड ने सभी ग्रेड के कोयले की कीमतों में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है।

नई कीमतें 1 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि से लागू हो जाएंगी। कंपनी ने यह संशोधन थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर किया है। दिसंबर 2025 के WPI आंकड़ों के अनुसार सूचकांक में 0.96% की वृद्धि हुई, लेकिन नियम के मुताबिक केवल 25% हिस्सा ही कीमतों में जोड़ा गया, जिससे कुल बढ़ोतरी 0.24% रह गई। यह बदलाव मुख्य रूप से नॉन-रेगुलेटेड सेक्टर के लिए लागू होगा, जबकि ई-ऑक्शन में भी नई दरें प्रभावी होंगी।

कोल इंडिया ने अपनी सभी सहायक कंपनियों- बीसीसीएल, ईसीएल, सीसीएल आदि- को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। कुछ प्रमुख ग्रेड की नई अनुमानित कीमतें इस प्रकार हैं:

• जी-2 ग्रेड: लगभग 3600 रुपये प्रति टन

• जी-3 ग्रेड: लगभग 3449 रुपये प्रति टन

• जी-4 ग्रेड: लगभग 3287 रुपये प्रति टन

• जी-10 ग्रेड: लगभग 1360 रुपये प्रति टन

• जी-17 ग्रेड: लगभग 561 रुपये प्रति टन

वेस्ट एशिया में युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। कतर और यूएई से LNG की आपूर्ति में कमी से एशियाई देशों में गैस की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। नतीजतन, बांग्लादेश, फिलीपींस, थाईलैंड जैसे देशों सहित भारत में भी कई यूटिलिटीज कोयला-आधारित बिजली उत्पादन बढ़ा रही हैं। वैश्विक थर्मल कोल की कीमतें में 13-20% तक की तेजी आई है, जिससे घरेलू कोयले की मांग और ई-ऑक्शन प्रीमियम में भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, कोल इंडिया का कहना है कि देश में कोयले का पर्याप्त स्टॉक है- पिटहेड और पावर प्लांट्स पर कुल 200 मिलियन टन से अधिक- जो ग्रीष्मकालीन मांग को संभाल सकता है। कंपनी ने FY26 में 875 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है और बिजली “जस्ट प्राइस” पर उपलब्ध रखने का वादा किया है।

यह बढ़ोतरी भले ही छोटी हो, लेकिन स्टील, सीमेंट और बिजली क्षेत्र पर दबाव डाल सकती है, खासकर समर सीजन में जब डिमांड पीक पर होती है। कोल इंडिया के शेयर हाल में 4-6% तक उछले हैं, क्योंकि निवेशक कोयला डिमांड में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव लंबा खिंचा तो घरेलू कोयले की मांग और मजबूत हो सकती है, लेकिन सरकार का फोकस ऊर्जा सुरक्षा और किफायती बिजली पर बना रहेगा।