पटना, 19 मार्च 2026: बिहार की सियासत में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर मोकामा के पूर्व विधायक और जद(यू) नेता अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। न्यायमूर्ति चंद्रशेखर झा की एकलपीठ ने सोनू-मोनू फायरिंग मामले में उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। इस फैसले से लंबे समय से जेल में बंद अनंत सिंह के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
निचली अदालत ने पहले उनकी जमानत खारिज कर दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें राहत प्रदान की। इस केस में अनंत सिंह पर आरोप था कि उन्होंने अपने सहयोगियों के माध्यम से मोकामा क्षेत्र में सोनू और मोनू नामक भाइयों के घर पर गोलीबारी करवाई थी। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत चार्ज लगे थे।
जमानत मिलने के बाद बेल की कॉपी जेल प्रशासन को सौंपी गई। अनंत सिंह के समर्थकों ने मोकामा में जमकर जश्न मनाया। कई जगहों पर पटाखे छोड़े गए और मिठाइयां बांटी गईं। क्षेत्र में उनकी वापसी से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अनंत सिंह पहले भी कई मामलों में जेल जा चुके हैं और बाहर आकर मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाए रखते हैं।
हालांकि, ध्यान देने वाली बात है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड जैसे अन्य गंभीर मामलों में उनकी जमानत याचिकाएं निचली अदालतों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, वे अभी भी उन मामलों में जेल में हैं, और हाईकोर्ट में चुनौती दी जा रही है। इस जमानत का लाभ मुख्य रूप से फायरिंग केस तक सीमित है, न कि सभी लंबित मामलों में।
बिहार की बाहुबली राजनीति में यह घटना फिर से सुर्खियां बटोर रही है, जहां जेल से बाहर आना और सक्रिय राजनीति करना आम बात बन गई है। मोकामा में अनंत सिंह की सक्रियता बढ़ने से आने वाले दिनों में क्षेत्रीय समीकरणों पर असर पड़ सकता है। उनके विरोधी इसे राजनीतिक मजबूती के रूप में देख रहे हैं, जबकि समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं।