रांची, 24 जनवरी 2026: झारखंड विधानसभा में कांग्रेस के अपने ही मंत्रियों के खिलाफ विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के पांच विधायकों ने दिल्ली पहुंचकर हाईकमान से मुलाकात की और कांग्रेस कोटे के मंत्रियों के कामकाज पर गंभीर शिकायतें दर्ज कीं। विधायकों ने मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका देने की मांग भी की है।
नाराज विधायकों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता राजेश कच्छप, कांके के विधायक सुरेश बैठा, सिमडेगा के भूषण बाड़ा, कोलेबिरा के नमन विक्सल कोन्गाड़ी, जगन्नाथपुर के सोनाराम सिंकू है।
इन विधायकों ने पहले प्रदेश प्रभारी के. राजू से मुलाकात की, उसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं संगठन प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल के आवास पर जाकर विस्तृत चर्चा की। विधायकों का मुख्य आरोप है कि कांग्रेस के चार मंत्री क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे, विधायकों की बात नहीं सुन रहे और कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी को नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे पार्टी के स्थानीय स्तर पर संगठन कमजोर हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह असंतोष पिछले कई महीनों से चल रहा है। विधायक दल की पिछली बैठकों में भी मंत्रियों को खरी-खोटी सुनाई गई थी। पार्टी हाईकमान ने पहले “समन्वय मॉडल” शुरू किया था, जिसमें मंत्रियों को विधायकों से नियमित संवाद करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन हाल की दिल्ली यात्रा से साफ है कि समस्या अभी बरकरार है।
झारखंड में महागठबंधन सरकार में कांग्रेस के चार मंत्री हैं। यह आंतरिक कलह गठबंधन सरकार के लिए चुनौती बन सकती है, खासकर जब सरकार को बने ज्यादा समय नहीं हुआ है। हालांकि, कांग्रेस के कुछ प्रदेश स्तर के नेताओं ने इसे “सामान्य चर्चा” बताकर विवाद को कम करने की कोशिश की है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाईकमान इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है और जल्द ही समन्वय बढ़ाने या आवश्यक बदलाव के संकेत दे सकता है। फिलहाल, यह घटना झारखंड कांग्रेस में जारी आंतरिक तनाव को उजागर करती है, जो संगठन की एकजुटता पर सवाल उठा रही है।