रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
रांची, 3 दिसंबर: राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में सत्र 2025-26 के एमबीबीएस प्रथम वर्ष में फर्जी अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाणपत्र के जरिए प्रवेश लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। छात्रा काजल (पिता विनोद कुमार) का नामांकन सोमवार, 1 दिसंबर 2025 को पूरी तरह रद्द कर दिया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि काजल ने NEET-UG 2025 में ओबीसी-एनसीएल (केंद्रीय सूची) श्रेणी से परीक्षा दी थी, लेकिन झारखंड रैंक में वह सामान्य वर्ग में थीं। फिर भी उसने झारखंड कोटे की एससी श्रेणी में रैंक-1 हासिल कर रिम्स में सीट ले ली। शिकायत मिलने पर 13 अक्टूबर 2025 को रिम्स प्रशासन ने गिरिडीह सर्किल ऑफिसर से जाति प्रमाणपत्र की जांच कराई।
सीओ की रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि काजल ने भैरो चमार के परिवार की वंशावली को पूरी तरह जाली बनाकर एससी सर्टिफिकेट हासिल किया। वास्तविक वंशजों से पूछताछ में काजल का कोई रिश्ता सिद्ध नहीं हुआ। NEET आवेदन और JCECEB दस्तावेजों में भी पिता के नाम व स्पेलिंग में भारी विसंगति पाई गई।
20 नवंबर को छात्रा को निलंबित कर दिया गया था। सोमवार को विधि विशेषज्ञ की राय के बाद नामांकन रद्द करने का अंतिम आदेश जारी हुआ। रिम्स निदेशक डॉ. राज कुमार ने कहा, “फर्जी दस्तावेज से एक योग्य एससी उम्मीदवार का हक मारा गया। हमने हॉस्टल खाली करने और कक्षा में प्रवेश पर पूर्ण रोक का आदेश दे दिया है।”
यह मामला JCECEB की दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। रिम्स ने अब सभी नए छात्रों के प्रमाणपत्रों की दोबारा गहन जांच शुरू कर दी है।