झारखंड में चार महीने बाद बालू खनन से हटी रोक, अगले आठ महीने तक होगा उठाव

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फिलहाल 14 वैध बालू घाटों से ही खनन की अनुमति, आम लोगों को सस्ती बालू मिलने की उम्मीद

रांची, 16 अक्टूबर: झारखंड में बालू खनन पर लगी चार महीने की रोक हट गई है। 15 अक्टूबर 2026 को मानसून अवधि के दौरान लागू प्रतिबंध की समय-सीमा समाप्त होने के बाद राज्य में वैध बालू घाटों से बालू उठाव का रास्ता साफ हो गया है। खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, अब अगले आठ महीने तक निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय शर्तों के तहत बालू का उठाव किया जा सकेगा।

राज्य में बालू की उपलब्धता बढ़ाने और निर्माण कार्यों को गति देने के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, रोक हटने के बावजूद तत्काल पूरे राज्य में बालू की आपूर्ति सामान्य होने की संभावना नहीं है। इसकी प्रमुख वजह अधिकांश बालू घाटों को खनन शुरू करने के लिए जरूरी स्वीकृतियां नहीं मिलना है।

खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य में कुल 444 बालू घाट चिह्नित किए हैं। इनमें से 302 घाटों की नीलामी होने की जानकारी सामने आई है, लेकिन कई घाटों पर पर्यावरणीय स्वीकृति, वन विभाग की अनापत्ति, ग्रामसभा की अनुमति और संचालन संबंधी मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं लंबित हैं। इस कारण फिलहाल छह जिलों के 14 घाटों से ही वैध बालू उठाव संभव बताया गया है।

इन जिलों में रामगढ़, रांची, हजारीबाग, दुमका, गोड्डा और पूर्वी सिंहभूम शामिल हैं। रामगढ़ जिले के सिरका, तोकीसूद और पैंकी घाट भी वैध उठाव से संबंधित सूची में शामिल हैं।

बालू खनन पर रोक हटने से मकान निर्माण कराने वाले लोगों, ठेकेदारों और निर्माण व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बालू की कीमतों में तत्काल कमी आना निश्चित नहीं है। इसके लिए जरूरी होगा कि अधिक से अधिक घाटों की लंबित स्वीकृतियां पूरी हों और बाजार में वैध बालू की आपूर्ति बढ़े।

मानसून के दौरान नदियों में बालू के प्राकृतिक संचय और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए खनन पर प्रतिबंध लगाया जाता है। अब प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के बाद भी खनन निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जा सकेगा। अवैध उत्खनन और परिवहन पर नियंत्रण बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि बालू घाटों का संचालन कितनी तेजी से शुरू होता है और इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को कब तक मिलता है।