रांची, 24 अगस्त: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर जारी विवाद के बीच 15 सितंबर की तारीख अहम मानी जा रही है। JSSC-CGL और CDPO भर्ती से जुड़े मामलों में झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों को राहत देते हुए राज्य सरकार के नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर रोक लगा रखी है। इन मामलों की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है।
राज्य सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कराई जा रही है। JSSC कार्यालय में CID की कार्रवाई और चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के साथ मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL और कथित मास्टरमाइंड समेत कई लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
सरकार के परीक्षा और नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित गड़बड़ी के ठोस सबूत क्या हैं और उसका दायरा कितना है। चयनित अभ्यर्थियों का एक वर्ग लगातार यह मांग कर रहा है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन बिना दोष साबित हुए सभी चयनित अभ्यर्थियों को दंडित नहीं किया जाए। कई चयनित अभ्यर्थी नौकरी जाने की आशंका को लेकर आंदोलन भी कर रहे हैं।
भर्ती विवाद में CBI जांच की मांग भी उठ रही है। विपक्ष और आंदोलनरत अभ्यर्थियों की ओर से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने भी जांच को केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रखने के बजाय कथित मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर CBI जांच कराने की मांग का समर्थन किया है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि 15 सितंबर को सभी चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी चली जाएगी। उपलब्ध न्यायिक घटनाक्रम के अनुसार 15 सितंबर अगली सुनवाई की महत्वपूर्ण तारीख है, जिस पर हाईकोर्ट सरकार की ओर से रखे जाने वाले तथ्यों और जांच की स्थिति पर विचार कर सकता है। इससे यह तय करने की दिशा साफ होगी कि नियुक्तियों पर लगी रोक आगे किस रूप में जारी रहती है और सरकार के रद्दीकरण संबंधी फैसले का भविष्य क्या होगा।
ऐसे में हजारों चयनित अभ्यर्थियों की निगाहें अब 15 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं। सरकार के सबूत, जांच की प्रगति और अदालत का रुख यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि नियुक्तियां बचती हैं, रद्दीकरण का फैसला प्रभावी होता है या मामले में कोई नया रास्ता निकलता है।