खनिज विधेयक के विरोध में झामुमो का शंखनाद, 20 अगस्त को केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में बनेगी आंदोलन की रणनीति

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रांची,17 अगस्त: केंद्र सरकार के खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड में सियासी टकराव तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने विधेयक के खिलाफ व्यापक आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की ओर से राज्यभर में जिला स्तर पर बैठकों का दौर शुरू किया गया है। रविवार को कई जिलों में पार्टी की बैठकें आयोजित कर आंदोलन की तैयारियों पर चर्चा की गई।

झामुमो ने इस मुद्दे पर अपनी आगे की रणनीति तय करने के लिए 20 अगस्त को रांची में केंद्रीय कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री एवं पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन करेंगे। इसमें केंद्र के नए खनिज विधेयक के प्रावधानों, झारखंड के हितों पर इसके संभावित प्रभाव और आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर तेज करने की रणनीति पर चर्चा होगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बैठक में आंदोलन के अगले चरण की घोषणा भी की जा सकती है।

झामुमो का आरोप है कि नए कानून से खनिज संपदा पर राज्यों के अधिकार और आर्थिक स्वायत्तता प्रभावित होगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में है और खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी ने विधेयक को झारखंड के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने केंद्र से विधेयक पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में झारखंड में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

झामुमो नेताओं ने आर्थिक नाकेबंदी तक की चेतावनी दी है। हालांकि, इसका अंतिम स्वरूप और कार्यक्रम क्या होगा, यह पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में तय होने की संभावना है। पार्टी जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं को आंदोलन के लिए तैयार करने और मुद्दे को गांव से लेकर शहर तक पहुंचाने की तैयारी में जुटी है।

इस पूरे घटनाक्रम से केंद्र और झारखंड सरकार के बीच खनिज संसाधनों, राजस्व और राज्यों के अधिकारों को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज होने के आसार हैं। अब सबकी नजर 20 अगस्त की झामुमो केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक पर टिकी है, जहां आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है।