रांची, 26 जून: झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत कांग्रेस पार्टी ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के निष्कासन को रद्द कर दिया है। पार्टी के इस फैसले के बाद हजारीबाग और बड़कागांव क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने मार्च 2026 में योगेंद्र साव को पार्टी अनुशासन के उल्लंघन तथा गठबंधन सरकार और नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर तीन वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। उस समय पार्टी ने इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई बताते हुए संगठनात्मक निर्णय कहा था।
निष्कासन के बाद कांग्रेस विधायक और योगेंद्र साव की पुत्री अंबा प्रसाद ने पार्टी नेतृत्व के फैसले पर खुलकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए केंद्रीय नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की थी।
अब पार्टी द्वारा निष्कासन रद्द किए जाने को संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बड़कागांव क्षेत्र में योगेंद्र साव का प्रभाव अब भी मजबूत है और आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए कांग्रेस ने यह कदम उठाया है।
योगेंद्र साव लंबे समय से झारखंड की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। हाल के महीनों में वे विभिन्न आंदोलनों और विवादों को लेकर भी चर्चा में रहे थे। उनके निष्कासन की वापसी को कांग्रेस के भीतर मतभेदों को कम करने तथा संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पार्टी के इस निर्णय के बाद समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है, जबकि विपक्षी दल इसे कांग्रेस की आंतरिक राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस फैसले का असर झारखंड की राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।