लोकसभा में औंधे मुंह गिरा महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, सरकार को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला

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नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2026: संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने के लिए लाया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 भारी मत विभाजन के बाद गिर गया। संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत न मिलने से सरकार को बड़ा झटका लगा है।

मत विभाजन में विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। सदन में कुल 528 सदस्य मौजूद थे और मतदान में 528 ने भाग लिया। संविधान संशोधन पास करने के लिए लगभग 352-360 वोटों की जरूरत थी, जो सरकार हासिल नहीं कर सकी।

इस विधेयक के साथ सरकार ने परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किए थे। इनका मकसद लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करना और नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को जल्द लागू करना था, ताकि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल सके।

विपक्ष, खासकर कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने विधेयक का पुरजोर विरोध किया। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह “महिलाओं के नाम पर संविधान बदलने” की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि असल मकसद परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण करना है, जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व घट सकता है और उत्तर-दक्षिण विभाजन बढ़ेगा।

कांग्रेस ने मांग की कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करके तुरंत लागू किया जाए। शशि थरूर और अन्य नेताओं ने भी कहा कि 2023 का मूल अधिनियम पर्याप्त था, लेकिन सरकार इसे परिसीमन से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।

गृह मंत्री अमित शाह और अन्य सत्तापक्षी नेताओं ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटिंग से पहले अपील की थी कि सभी दल “नारी शक्ति” के हक के लिए साथ दें। सरकार का तर्क था कि सीटें बढ़ाने से किसी मौजूदा सांसद की सीट नहीं कटेगी और महिलाओं को बिना किसी की कुर्सी छीने आरक्षण मिल सकेगा।

विधेयक के गिरने के बाद सरकार ने परिसीमन विधेयक आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि दोनों बिल आपस में जुड़े हैं। 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले ही अधिसूचित हो चुका है, लेकिन बिना परिसीमन के उसे मौजूदा सदन में लागू नहीं किया जा सकता।

विपक्ष ने इसे अपनी “बड़ी जीत” बताया है, जबकि सत्तापक्ष ने विपक्ष पर “महिलाओं के खिलाफ” रुख अपनाने का आरोप लगाया।

यह घटना संसद में तीखी बहस और सियासी घमासान के बीच हुई। अब सरकार को नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत पड़ सकती है, क्योंकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने का प्रयास फिलहाल ठप पड़ गया है।