रांची/पलामू, 17 अप्रैल: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा की नई नियमावली रद्द करने के फैसले के बावजूद राज्य में अभ्यर्थियों का आक्रोश थमा नहीं है। भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को स्थानीय भाषा की सूची से बाहर किए जाने को लेकर पलामू, गढ़वा, गोड्डा, चतरा, गिरिडीह, लातेहार समेत कई जिलों में जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी है। आक्रोशित अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कैबिनेट बैठक में दो मंत्रियों समेत कई नेताओं के विरोध के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर JTET नियमावली को रद्द कर दिया गया था। नई नियमावली में इन भाषाओं को बाहर करने से बिहार से सटे जिलों के लाखों अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे। नियमावली रद्द होने से उन्हें कुछ राहत मिली है, लेकिन JTET परीक्षा कब होगी और नई नियमावली में भाषाओं को किस रूप में शामिल किया जाएगा, इस पर अभी असमंजस बरकरार है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भोजपुरी और मगही पलामू प्रमंडल की पहचान हैं, जबकि अंगिका संताल परगना क्षेत्र की प्रमुख भाषा है। इन्हें बाहर करना स्थानीय युवाओं और क्षेत्रीय संस्कृति के साथ अन्याय है। कई जगहों पर छात्रों ने सड़क जाम कर नारे लगाए और सरकार से तुरंत नई नियमावली में इन भाषाओं को शामिल करने की मांग की।
भानु प्रताप शाही समेत स्थानीय नेताओं ने इसे युवाओं की जीत बताया, लेकिन साथ ही सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने 2016 की पुरानी तर्ज पर जल्द JTET परीक्षा कराने की मांग की है।
शिक्षा विभाग सूत्रों के अनुसार, अब नई नियमावली बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि 2012 या 2016 की नियमावली के अनुरूप क्षेत्रीय भाषाओं को पूरी तरह शामिल किया जाए ताकि कोई विवाद न रहे।
JTET की आखिरी परीक्षा 2016 में हुई थी। पिछले 10 साल से परीक्षा न होने और नियमावली में बार-बार बदलाव से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।