रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
रांची/चाईबासा, 23 दिसंबर 2025: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में एक बच्चे की मौत के बाद उसके पिता द्वारा शव को थैले में लेकर जाने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। शुरुआती खबरों में बच्चे को 4 साल का बताया गया और अस्पताल की लापरवाही का आरोप लगाया गया। अब सदर अनुमंडल पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं, जिससे मामला पूरी तरह स्पष्ट हो गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मृत बच्चे की उम्र महज 4 महीने थी, न कि 4 साल जैसा कि वायरल वीडियो और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था। बच्चे की पहचान कृष्ण चातोम्बा पिता डिम्बा चातोम्बा, गांव: बालजोड़ी, नोवामुंडी के रूप में हुई है। बच्चा 18 दिसंबर की शाम बुखार और दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल में भर्ती हुआ था। जांच में मलेरिया पॉजिटिव पाया गया और स्थिति गंभीर होने पर जमशेदपुर रेफर किया गया, लेकिन 19 दिसंबर को मौत हो गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल में दो शव वाहन उपलब्ध थे। एक खराब था, जबकि दूसरा बाहर गया हुआ था और जल्द लौटने वाला था। स्टाफ ने परिजनों से इंतजार करने को कहा, लेकिन पिता हड़बड़ी में असहज होकर खुद शव थैले में लेकर चले गए। पिता के पास मोबाइल फोन नहीं होने से संपर्क भी नहीं हो सका। उस दिन पीडियाट्रिक वार्ड में 33 बच्चे भर्ती थे, लेकिन केवल दो नर्स ड्यूटी पर थीं, जिससे व्यस्तता थी।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, “गलत जानकारी फैलाई गई। परिजनों ने इंतजार नहीं किया। कुछ लोग स्वास्थ्य विभाग को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।” मंत्री ने स्पष्ट किया कि 108 एंबुलेंस मरीजों के लिए है, जबकि मोक्ष वाहन शवों के लिए।
इस घटना के बाद झारखंड सरकार हरकत में आई है। सभी सदर अस्पतालों में मोक्ष वाहन उपलब्ध कराने के लिए 15 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मंत्री ने निर्देश दिया है कि एक महीने में नए वाहन खरीदे जाएं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को जरूर उजागर करता है, लेकिन जांच से साफ है कि अस्पताल की ओर से बड़ी लापरवाही नहीं हुई। फिर भी, गरीब परिवारों की मजबूरी ने सबको झकझोर दिया है।