रांची। झारखंड में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती बड़े धूमधाम और सम्मान के साथ मनाई गई। राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बाबा साहेब को सामाजिक न्याय और समानता का प्रतीक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस बीच राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन के एक बयान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
क्या बोले मंत्री हफीजुल हसन?
एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में मंत्री हसन ने कहा, “हम मुसलमान कुरान सीने में रखते हैं और संविधान हाथ में। मेरे लिए शरीयत बड़ा है, इसलिए पहले शरीयत और फिर संविधान।” उनके इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह भारत के संविधान की भावना के खिलाफ है।
भाजपा का पलटवार
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर मंत्री का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “हसन के लिए शरीयत महत्वपूर्ण है, संविधान नहीं। ये लोग सिर्फ अपनी कौम के प्रति वफादार हैं और इस्लामिक एजेंडा चला रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि मंत्री की यह सोच आदिवासी अस्मिता और राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए गंभीर खतरा है।
बर्खास्तगी की मांग
मरांडी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हसन को मंत्रिमंडल से तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो लोग संवैधानिक पदों पर बैठकर कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं, उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
हफीजुल हसन ने दी सफाई
विवाद बढ़ने पर मंत्री हसन ने बयान से यू-टर्न लेते हुए सफाई दी कि “संविधान और शरीयत दोनों ही हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। मैंने कहा था कि शरीयत मेरे सीने में है और संविधान हाथ में। दोनों का अपना स्थान है और दोनों को हम मानते हैं।”
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया
यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब देशभर में डॉ. आंबेडकर की जयंती को सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाया जा रहा था। मंत्री के बयान को लेकर देश के अन्य हिस्सों से भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर हमलावर हो गया है।