ओरमांझी-गोला एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग पूरा: 1 घंटे का सफर अब मात्र 25 मिनट में, रांची-बोकारो कनेक्टिविटी को मिलेगा मजबूती 

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रांची, 12 अक्टूबर 2025: झारखंड के लिए एक बड़ी खुशखबरी! केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘भारतमाला’ परियोजना के तहत बन रहे ओरमांझी-गोला एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य अब 90% से अधिक पूरा हो चुका है। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से रांची के ओरमांझी से रामगढ़ के गोला तक की 27.8 किलोमीटर की दूरी, जो वर्तमान में व्यस्त सड़कों पर 1 घंटे से ज्यादा लगती है, अब सिर्फ 25-30 मिनट में तय हो जाएगी। यह झारखंड का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, जो पर्यावरण-अनुकूल और हाई-स्पीड यात्रा का नया द्वार खोलेगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की अनुमानित लागत 1,214 करोड़ रुपये है, जबकि पूरे ओरमांझी-गोला-बोकारो खंड की कुल लागत 2,221 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एक्सप्रेसवे फोर-लेन (भविष्य में सिक्स-लेन) होगा, जिसमें 7 ब्रिज, 24 अंडरपास, एक रेल ओवर ब्रिज , ड्राइवर रेस्ट हाउस और टोल सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। यह सिग्नल-फ्री रोड होगा, जहां वाहन 100 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगे। मार्ग में गुडू, पेटरवार समेत 16 गांवों से गुजरने वाली यह सड़क मौजूदा ओरमांझी-सिकिदरी-गोला-बोकारो रोड से पूरी तरह अलग बनेगी।

मूल रूप से जून 2025 तक पूरा होने वाली इस परियोजना में कुछ देरी हुई, लेकिन हालिया रिपोर्ट्स से साफ है कि काम तेजी पकड़ चुका है। अप्रैल 2025 में जब प्रगति 75% से कम थी, तब भूमि अधिग्रहण और वन विभाग की NOC जैसी छोटी-मोटी बाधाओं ने काम को प्रभावित किया था। लेकिन अब ये मुद्दे लगभग सुलझ चुके हैं, और 2025 के अंत तक उद्घाटन की उम्मीद है। NHAI ने दो पैकेज में काम बांटा है ओरमांझी-गोला और गोला-बोकारो जिसके टेंडर गुजरात की एक प्रमुख कंपनी को सौंपे गए हैं।

स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ रांची-बोकारो की कनेक्टिविटी मजबूत करेगा, बल्कि रांची से कोलकाता की कुल दूरी 80 किमी कम हो जाएगी। इससे पूर्वी भारत के आर्थिक हब जैसे धनबाद और बोकारो को सीधा लाभ मिलेगा। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “ट्रैफिक जाम से परेशान हमारी जिंदगी आसान हो जाएगी। माल ढुलाई का खर्च घटेगा और समय बचेगा।”

यह परियोजना झारखंड को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने का एक बड़ा कदम है। वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे से लिंक होने के कारण यह पूरे क्षेत्र की यात्रा को क्रांतिकारी बनाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट 20-30% कम हो सकती है। हालांकि, कुछ पर्यावरणविदों ने वन क्षेत्र में प्रभाव को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है, जिस पर NHAI ने ग्रीन कॉरिडोर मानकों का पालन करने का आश्वासन दिया है।

NHAI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “काम की निगरानी साप्ताहिक आधार पर हो रही है। छोटी चुनौतियां बाकी हैं, लेकिन हम समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” यदि सब ठीक रहा, तो दिसंबर 2025 तक वाहन इस एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरते नजर आ सकते हैं।

झारखंड सरकार और केंद्र के इस प्रयास से राज्यवासियों में उत्साह है। यह एक्सप्रेसवे झारखंड को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।