झारखंड: चरकी देवी की प्रेरक यात्रा- गरीबी से आत्मनिर्भरता तक

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रामगढ़, 16 सितंबर 2025: झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड के जराद गांव की चरकी देवी ने अपनी मेहनत और हिम्मत से गरीबी को मात देकर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। कभी उनके 10 सदस्यीय परिवार का गुजारा पति नागेश्वर महतो की मजदूरी से मुश्किल से चलता था। महाजनों से 10% ब्याज पर लिया कर्ज परिवार को कर्ज के जाल में फंसाता था। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। चरकी हमेशा कम ब्याज पर ऋण लेकर व्यवसाय शुरू करने का सपना देखती थीं।

2017 में झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के तहत बने ‘संगम आजीविका सखी मंडल’ से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। समूह ने उन्हें बचत, समूह बैठक और कम ब्याज पर ऋण की सुविधा सिखाई। शुरुआत में 1% ब्याज पर 4,000 रुपये के ऋण से चरकी ने मुर्गी पालन शुरू किया। बाद में 50,000 रुपये तक के ऋण से व्यवसाय बढ़ाया। आज उनके फार्म में 1,000 चूजे हैं, जिससे सालाना 1.20 लाख रुपये की आय होती है।

इस आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बच्चों की पढ़ाई सुधरी और मजदूरी पर निर्भरता खत्म हुई। गांव में चरकी अब एक सफल उद्यमी के रूप में जानी जाती हैं, जो अन्य महिलाओं को प्रेरित करती हैं। वे अपने फार्म को 2,000 चूजों तक विस्तार देना चाहती हैं। चरकी अपनी सफलता का श्रेय JSLPS और समूह को देती हैं। उनकी कहानी ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल है।