विद्यार्थियों ने प्रेमचंद साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर रखे विचार
रामगढ़: राधा गोविंद विश्वविद्यालय, रामगढ़ के हिंदी विभाग द्वारा 31 जुलाई 2025 को हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय था “प्रेमचंद साहित्य की प्रासंगिकता”, जिसमें विभाग के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रेमचंद की लेखनी से जोड़ना तथा उनके साहित्य में छिपे सामाजिक और नैतिक मूल्यों की वर्तमान समय में उपयोगिता को समझाना था। प्रतिभागियों ने “गोदान”, “निर्मला”, “कफन”, “ईदगाह” जैसी कालजयी रचनाओं के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह दर्शाया कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक विषमता, स्त्री अधिकार, नैतिक संघर्ष और वर्गभेद जैसे मुद्दों पर उतना ही प्रासंगिक है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री बी.एन. साह ने प्रेमचंद जयंती पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को आईना दिखाने का कार्य करता है। सचिव प्रियंका कुमारी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ आज भी हमारी सोच को दिशा देती हैं और हमें उनके आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनमीत कौर ने कहा कि प्रेमचंद की लेखनी समाज की सच्चाइयों को उजागर करने वाली लेखनी है, जो हर युग में प्रासंगिक बनी रहती है। साथ ही डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा और डॉ. सत्येन्द्र कुमार ने भी प्रेमचंद के साहित्य पर अपने विचार रखे।
प्रतियोगिता के अंत में निर्णायक मंडल द्वारा श्रेष्ठ प्रतिभागियों का चयन किया गया, जिसमें स्वेता को प्रथम, नेहा को द्वितीय तथा किशोर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
इस आयोजन को सफल बनाने में हिंदी विभाग की सक्रिय भूमिका रही। मौके पर कुलसचिव प्रो. डॉ. निर्मल कुमार मंडल, परीक्षा नियंत्रक प्रो. डॉ. अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, विभागीय शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।