चुनाव आयोग की नई रणनीति: बिहार चुनाव से पहले मतदाता सूची के लिए घर-घर सत्यापन पर विचार

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नई दिल्ली। आगामी बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तहत चुनाव आयोग (ईसीआई) मतदाता सूची की शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए एक अहम कदम उठाने की तैयारी में है। आयोग इस बार मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान घर-घर जाकर व्यापक जांच अभियान शुरू करने पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य फर्जी या अपात्र नामों को सूची से हटाना और पात्र नागरिकों को ही मतदाता के रूप में पंजीकृत करना है।

बीते कुछ वर्षों में कई राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और निगरानी एजेंसियों ने मतदाता सूची में अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई है। आयोग का कहना है कि उसकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल वही लोग दर्ज हों जो संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के तहत योग्य हों।

विभिन्न कारणों से लोगों का लगातार स्थानांतरण, जैसे नौकरी, शिक्षा या विवाह, मतदाता सूची में बदलाव की मांग को जन्म देता है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 46.26 लाख मतदाताओं ने अपने पते बदले, जबकि 2.32 करोड़ लोगों ने विवरणों में सुधार की मांग की। साथ ही, 33.16 लाख मतदाताओं ने पहचान पत्र बदलने के लिए आवेदन किया। इसके अलावा, मृतकों के नाम अक्सर समय पर न हटाए जाने से भी सूची में गड़बड़ी रहती है।

आयोग ने हाल ही में प्रति मतदान केंद्र अधिकतम मतदाता संख्या को 1,500 से घटाकर 1,200 करने का निर्णय लिया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि कोई भी मतदाता 2 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय न करे। अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान कर उनके नामों को सूची से हटाना भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों को आपत्ति और दावा दाखिल करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। बावजूद इसके, कुछ दल यह आरोप लगाते रहे हैं कि मतदाता सूची में जानबूझकर हेराफेरी की जाती है। इन परिस्थितियों को देखते हुए आयोग 2004 के बाद पहली बार फिर से गहन घर-घर जांच की योजना बना रहा है, ताकि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची त्रुटिहीन बनाई जा सके।