543 ब्रांड और पैक की कीमतों में संशोधन, कैंसर मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत; सरकार को सालाना हजारों करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर: कैंसर के इलाज पर होने वाले भारी खर्च को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती की है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के 543 ब्रांड और पैक की अधिकतम खुदरा कीमतों में संशोधन किया है। कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के अंतर्गत यह कदम दवाओं की बिक्री और वितरण के दौरान लिए जाने वाले अत्यधिक व्यापारिक मार्जिन पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार ने संबंधित दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित किया है, जिससे मरीजों को महंगे इलाज के खर्च में राहत मिल सकेगी।
रिपोर्टों के अनुसार, संशोधित कीमतों में कई दवाओं के दाम में बड़ी कमी हुई है। प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
• पाल्बोसिक्लिब (Palbociclib): एक ब्रांड के 125 मिलीग्राम के 21 कैप्सूल वाले पैक की कीमत ₹40,421.33 से घटकर ₹2,720 हो गई है।
• थायोटेपा (Thiotepa): सैमटेपा ब्रांड के 100 मिलीग्राम इंजेक्शन वायल की कीमत ₹80,071.86 से घटकर ₹7,150.33 हो गई है।
• बेवाासिजुमैब (Bevacizumab): इवजुमैब ब्रांड के 400 मिलीग्राम इंजेक्शन की कीमत ₹69,852.12 से घटकर ₹13,512 हो गई है।
• ओलापैरिब (Olaparib): एक ब्रांड के 150 मिलीग्राम पैक की कीमत ₹46,364.05 से घटकर ₹11,573.68 हो गई है।
सरकार का उद्देश्य कैंसर के मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। सरकार ने पहले इस पहल से मरीजों को सालाना लगभग ₹2,500 करोड़ की बचत होने का अनुमान जताया था। वहीं, संशोधित कीमतों पर आई कुछ रिपोर्टों में संभावित बचत ₹2,500 करोड़ से ₹3,500 करोड़ सालाना तक बताई गई है।
इस फैसले के बावजूद सभी कैंसर दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कुछ महंगी मूल ब्रांड वाली दवाओं की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है। मरीजों को मिलने वाली वास्तविक राहत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित उपचार पर निर्भर करेगी।
नई कीमतें लागू होने के बाद दवा दुकानों और अस्पतालों को संशोधित दरों के अनुसार दवाएं उपलब्ध करानी होंगी।