नो मैपिंग के 10.14 लाख और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के 25.13 लाख मामलों का निष्पादन बाकी; मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राजनीतिक दलों के साथ साझा की अद्यतन स्थिति।
रांची, 27 अक्टूबर: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण- 2026 के तहत नो मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी से जुड़े कुल 35,28,778 मामले अब भी लंबित हैं। 26 अक्टूबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नो मैपिंग श्रेणी में 10,14,785 और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी में 25,13,993 मामलों का निष्पादन एवं निर्वाचन आयोग के ईसीआईनेट पोर्टल पर अपडेट किया जाना बाकी है।
सोमवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर एसआईआर की प्रगति की जानकारी साझा की। बैठक में जिलावार और विधानसभा क्षेत्रवार मामलों के निष्पादन की समीक्षा की गई। साथ ही, लंबित मामलों की सुनवाई, सत्यापन और निष्पादन की प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
नो मैपिंग श्रेणी में अब तक 27.72 प्रतिशत मामलों का निष्पादन हुआ है, जबकि लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी में 44.75 प्रतिशत मामलों का निष्पादन कर अपडेट किया गया है। इसके मुकाबले अन्य श्रेणी में 85.87 प्रतिशत मामलों का निष्पादन हो चुका है। आंकड़े बताते हैं कि सत्यापन से जुड़ी पहली दो श्रेणियों में अभी बड़ी संख्या में मामले निपटाए जाने बाकी हैं।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी में लोहरदगा में 98.57 प्रतिशत और पश्चिमी सिंहभूम में 94.78 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया गया है। वहीं, गोड्डा में यह आंकड़ा 19.46 प्रतिशत और पाकुड़ में 20.69 प्रतिशत है।
नो मैपिंग श्रेणी में लोहरदगा 67.92 प्रतिशत निष्पादन के साथ आगे है, जबकि पश्चिमी सिंहभूम में 60.12 प्रतिशत मामलों का निष्पादन हुआ है। दूसरी ओर, कोडरमा में 4.49 प्रतिशत और पलामू में 5.28 प्रतिशत मामलों का निष्पादन दर्ज किया गया है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम सूची में सुनिश्चित करना तथा मतदाता सूची को शुद्ध, समावेशी और त्रुटिरहित बनाना है। इसके लिए राजनीतिक दलों से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि लंबित या विसंगति वाले मामलों का मतलब मतदाता का नाम कट जाना नहीं है। इन मामलों में संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन, नोटिस के बाद सुनवाई और नियमानुसार निष्पादन किया जाना है। किसी मतदाता के नाम को शामिल करने या हटाने का अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।