नामांकन रद्द कराने वाले विद्यार्थियों को समय पर राशि नहीं लौटाने का मामला, रांची विश्वविद्यालय से BIT तक संस्थानों के नाम सूची में शामिल
रांची, 18 अक्टूबर: झारखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन रद्द कराने के बाद भी विद्यार्थियों को फीस वापस नहीं मिलने के मामलों पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने फीस रिफंड संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने के मामले में राज्य के 16 उच्च शिक्षण संस्थानों को नोटिस जारी किया है। इस संबंध में आयोग ने राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव और राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को संबंधित संस्थानों की सूची भेजी है।
UGC के सचिव प्रो. श्यामा रथ के स्तर से भेजे गए पत्र में फीस वापसी के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने पर जोर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों की शिकायतों को लेकर संबंधित संस्थानों को पहले भी जानकारी दी गई थी। इस संबंध में परामर्श बैठकें आयोजित करने, लिखित पत्राचार करने और टेलीफोन के माध्यम से संपर्क करने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात सामने आई है।
आयोग ने राज्य के संबंधित अधिकारियों से नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। साथ ही, राज्य के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को भी फीस रिफंड नीति का निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप पालन करने का निर्देश दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, UGC की सूची में रांची विश्वविद्यालय, झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची, इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, उषा मार्टिन विश्वविद्यालय, श्रीनाथ विश्वविद्यालय, झारखंड राय विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय, नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज, इक्फाई विश्वविद्यालय, आरकेडीएफ विश्वविद्यालय, झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय और कैपिटल विश्वविद्यालय के नाम शामिल हैं।
UGC की फीस रिफंड नीति के तहत नामांकन रद्द कराने की तारीख और संबंधित सत्र के लिए निर्धारित अंतिम तिथि के आधार पर फीस वापसी तय होती है। पात्रता और वापस मिलने वाली राशि लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित की जाती है। आयोग का उद्देश्य विद्यार्थियों को अनावश्यक आर्थिक परेशानी से बचाना और उच्च शिक्षण संस्थानों में फीस वापसी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।
अब संबंधित संस्थानों और राज्य के उच्च शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर विद्यार्थियों की नजर रहेगी।