परिसीमन में आदिवासी आरक्षित सीटें कम नहीं करने की मांग; पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-नगाड़ों के साथ होगा प्रदर्शन
रांची, 30 अगस्त: राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में 30 अगस्त को प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान रैली को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विभिन्न आदिवासी एवं सामाजिक संगठनों की ओर से आयोजित इस महाजुटान में झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजकों के अनुसार रैली का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के मुद्दे को मजबूती से उठाना है।
रैली को लेकर पिछले कई सप्ताह से राज्य के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क अभियान चलाया गया। आयोजकों ने बताया कि 24 जिलों से आदिवासी समाज, सामाजिक संगठनों, ग्राम प्रधानों, छात्र-युवा, महिला संगठनों और बुद्धिजीवियों की भागीदारी की तैयारी है। रैली में लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे और ढोल-नगाड़ों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी।
महाजुटान में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन का मुद्दा प्रमुख रहेगा। आयोजकों का कहना है कि वे परिसीमन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन केवल वर्तमान जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन किए जाने से झारखंड में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या प्रभावित होने की आशंका है। उनका कहना है कि आदिवासी आरक्षित सीटों में किसी भी परिस्थिति में कमी नहीं होनी चाहिए, बल्कि आबादी और प्रतिनिधित्व के अनुरूप इनकी संख्या बढ़नी चाहिए।
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की समेत कई आदिवासी नेताओं ने भी अलग-अलग जिलों में बैठक कर महाजुटान को सफल बनाने की अपील की है। उनका तर्क है कि परिसीमन का असर केवल निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि महाजुटान को किसी एक धर्म या राजनीतिक दल के कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि रैली आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित की जा रही है। रैली में सभी धर्मों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों को आमंत्रित किए जाने की बात कही गई है।
रैली को लेकर प्रशासन और यातायात पुलिस ने भी तैयारियां की हैं। बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के रांची पहुंचने की संभावना को देखते हुए शहर में यातायात व्यवस्था में बदलाव और अलग-अलग स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
इस महाजुटान को झारखंड में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।