रांची, 27 अगस्त: झारखंड की राजधानी रांची के सरकारी अस्पतालों में पत्रकारों के प्रवेश को लेकर विवाद गहरा गया है। रिम्स के बाद अब सदर अस्पताल में भी मीडिया की एंट्री और रिपोर्टिंग को लेकर सख्त नियम लागू किए जाने की खबर सामने आई है। इस मुद्दे पर झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक के बाद एक सरकारी संस्थानों में पत्रकारों की पहुंच सीमित कर रही है।
मरांडी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सरकार से सवाल करते हुए कहा कि लोकतंत्र में पत्रकार सरकार के मेहमान नहीं, बल्कि जनता की आंख और कान होते हैं। उनका कहना है कि पत्रकारों को सरकारी संस्थानों में जाकर व्यवस्था की स्थिति देखने और जनता से जुड़े सवाल उठाने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार को कैमरे और पत्रकारों की मौजूदगी से परेशानी क्यों हो रही है।
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि पहले रिम्स में पत्रकारों की एंट्री पर सख्ती की गई। इसके बाद प्रोजेक्ट भवन में मीडिया की पहुंच सीमित हुई और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भी पत्रकारों की रिपोर्टिंग को लेकर प्रतिबंध की स्थिति बनी। अब सदर अस्पताल में बिना अनुमति पत्रकारों के प्रवेश पर सख्ती किए जाने को उन्होंने इसी कड़ी का हिस्सा बताया है।
मरांडी ने तंज कसते हुए कहा कि अगर इसी तरह सरकारी संस्थानों में मीडिया की एंट्री रोकी जाती रही तो अगला नंबर थानों और दूसरे सरकारी कार्यालयों का हो सकता है। उन्होंने कहा कि कैमरा केवल तस्वीरें नहीं लेता, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही भी दर्ज करता है।
वहीं, अस्पताल प्रशासन की ओर से लागू किए गए नियमों के पीछे मरीजों की निजता, सुरक्षा और अस्पताल में अनुशासन बनाए रखने का तर्क दिया जा रहा है। सदर अस्पताल में आईसीयू, एचडीयू, एसएनसीयू, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को प्रतिबंधित क्षेत्र माना गया है। इन स्थानों पर रिपोर्टिंग, फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी के लिए अनुमति की व्यवस्था की गई है।
मीडिया की स्वतंत्रता और मरीजों की निजता के बीच संतुलन को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सरकारी पारदर्शिता से जोड़ रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन इसे मरीजों की गोपनीयता और संस्थागत व्यवस्था से जुड़ा कदम बता रहा है।
बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पत्रकारों की पहुंच सीमित करने से सवाल खत्म नहीं होंगे। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन से सवाल पूछना मीडिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस मुद्दे ने राज्य में मीडिया की स्वतंत्रता, सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।