नई दिल्ली, 05 जुलाई: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वर्ष 2022 से पहले एक साथ पूरी की गई दो शैक्षणिक डिग्रियों को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि वे समान अवधि में प्राप्त की गई थीं। अदालत ने इस मामले में चार चयनित पीजीटी अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के निर्णय पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।
मामला नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) द्वारा एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) भर्ती-2023 के तहत चयनित चार पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) अभ्यर्थियों से जुड़ा है। इन अभ्यर्थियों ने वर्ष 2022 से पहले एमए और बीएड जैसी दो डिग्रियां एक साथ पूरी की थीं। प्रारंभिक नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद जून 2024 में उनकी उम्मीदवारी यह कहते हुए रद्द कर दी गई कि दोनों डिग्रियां एक साथ हासिल की गई थीं।
दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि भर्ती एजेंसी को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करते समय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की संशोधित गाइडलाइन और उसके स्पष्टीकरण को ध्यान में रखना होगा। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2022 से पहले एक साथ पूरी की गई डिग्रियां, यदि उस समय लागू नियमों के अनुरूप प्राप्त की गई थीं, तो उन्हें वैध माना जाएगा।
अदालत ने यह भी माना कि 2022 की गाइडलाइन को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू कर पहले से प्राप्त डिग्रियों को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए एनईएसटी को चारों अभ्यर्थियों के मामलों पर नए सिरे से विचार कर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।
इस फैसले को उन हजारों छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए राहत माना जा रहा है, जिन्होंने वर्ष 2022 से पहले एक साथ दो शैक्षणिक कार्यक्रम पूरे किए थे और बाद में नियुक्ति या प्रवेश के दौरान उनकी डिग्रियों पर सवाल उठाए गए थे।