भरत तिवारी एनकाउंटर पर बिहार-झारखंड में सियासी उबाल

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पप्पू यादव ने बताया ‘आज का भगत सिंह’, झामुमो ने बीजेपी सरकार पर साधा निशाना

पटना/रांची, 21 जून। बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। बिहार से लेकर झारखंड तक इस घटना को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन पर कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर निशाना साधा जा रहा है।

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भरत तिवारी को “आज का भगत सिंह” बताते हुए कहा कि उनकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने बिहार की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

वहीं, झारखंड में हेमंत सरेन की पार्टी झामुमो के नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए बिहार सरकार को कठघरे में खड़ा किया। झामुमो नेताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में कानून के शासन की जगह ‘एनकाउंटर राजनीति’ को बढ़ावा दिया जा रहा है और पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।

मामले को लेकर बिहार की राजनीति में भी मतभेद सामने आए हैं। विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। बढ़ते दबाव के बीच बिहार सरकार ने भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

इधर, भरत तिवारी के परिजनों का दावा है कि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। इस दावे के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा बिहार और झारखंड दोनों राज्यों में बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, जबकि सरकार न्यायिक जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।