भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर झारखंड नतमस्तक, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने समाधि स्थल पर अर्पित की श्रद्धांजलि, पूरे राज्य में हुए स्मरण कार्यक्रम

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रांची, 10 जून। महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी, जननायक एवं ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर मंगलवार को पूरे झारखंड में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची स्थित बिरसा मुंडा समाधि स्थल और स्मारक पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनके संघर्ष, बलिदान और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए किए गए योगदान को याद किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ‘उलगुलान’ के महानायक बिरसा मुंडा के आदर्श आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के खिलाफ संघर्ष और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देते रहेंगे।

राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न जिलों में सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। कई स्थानों पर बिरसा मुंडा की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनके जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला गया।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भी भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने आदिवासी अधिकारों और सम्मान के लिए किए गए उनके संघर्ष को देश के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

गौरतलब है कि भगवान बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश शासन और शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ आंदोलन का नेतृत्व किया था। 9 जून 1900 को रांची जेल में उनका निधन हुआ था। मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने जो संघर्ष किया, वह आज भी आदिवासी समाज और पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।