पूर्णिया, 21 मई: भारत-नेपाल सीमा पर हाल के दिनों में बढ़ी सुरक्षा सख्ती ने वर्षों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। नेपाल प्रशासन द्वारा सीमा पार करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए वैध पहचान पत्र अनिवार्य किए जाने के बाद सीमावर्ती इलाकों में परेशानी बढ़ गई है। अब बिना आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य वैध दस्तावेज के लोगों को सीमा से ही वापस लौटाया जा रहा है।
बिहार के अररिया, सुपौल, किशनगंज और पूर्णिया जैसे सीमावर्ती जिलों में रोजाना हजारों लोग रोजगार, इलाज, व्यापार और पारिवारिक कारणों से नेपाल आते-जाते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जोगबनी समेत कई बॉर्डर इलाकों में लंबी कतारें और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। मजदूरों, छोटे व्यापारियों और मरीजों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, अवैध घुसपैठ रोकने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उठाया गया है। हाल के दिनों में सीमा पर जांच अभियान तेज किए गए हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है।
इधर, सीमा पर बढ़ी सख्ती और कस्टम नियमों को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सदियों पुराने सामाजिक और पारिवारिक संबंध अब ‘कागजी जांच’ के दायरे में आ गए हैं। हालांकि नेपाल सरकार ने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों के प्रवेश पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और पारंपरिक आवागमन व्यवस्था को बनाए रखने की बात कही गई है।