रामगढ़, 22 अप्रैल 2026: राधा गोविंद विश्वविद्यालय, रामगढ़ में बुधवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। “एनईपी 2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली: वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय शिक्षा” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, विद्वानों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी.एन. साह एवं अन्य मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। साथ ही संस्थापक स्व. राधा देवी एवं स्व. गोविंद साह के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्र देकर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलगीत एवं विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत झारखंडी सांस्कृतिक नृत्य से हुई।
मुख्य अतिथि के रूप में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. (डॉ) बिहारी लाल शर्मा, महाकौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति प्रो. (डॉ) आर.सी. मिश्रा एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता लल्लन तिवारी उपस्थित रहे। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई प्रख्यात शिक्षाविद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मेलन से जुड़े।
स्वागत भाषण में कुलपति प्रो. (डॉ) रश्मि ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा के केंद्र में स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास संभव होगा। इस दौरान मंचासीन अतिथियों द्वारा स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
अपने संबोधन में प्रो. (डॉ) बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि “धर्म वह प्रकाश है, जो मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान और असत्य से सत्य की ओर ले जाता है।” वहीं प्रो. (डॉ) आर.सी. मिश्रा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में कौशल विकास शिक्षा का आधार है, जो विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाता है।
कुलाधिपति बी.एन. साह ने सभी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विद्वानों का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ सकारात्मक सोच जुड़ने पर व्यक्ति में सहानुभूति, ईमानदारी एवं अनुशासन जैसे गुण विकसित होते हैं। अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने भी भारतीय ज्ञान प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे वैश्विक संदर्भ में समझने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजना पांडेय, डॉ. पूनम कुमारी एवं डॉ. अमरेश पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रो. (डॉ) निर्मल कुमार मंडल ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, विभिन्न विभागाध्यक्ष, देशभर से आए शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सम्मेलन के तहत विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक संवाद एवं विचार-विमर्श का सशक्त माहौल देखने को मिला।