नई दिल्ली, 17 अप्रैल: कल संसद के विशेष सत्र के पहले दिन लोकसभा में महिला आरक्षण को 2029 के चुनावों से लागू करने और सीटों के परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने का प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हो गया।
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 सहित परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को सदन में पेश करने के प्रस्ताव पर मत विभाजन हुआ, जिसमें 207 सांसदों ने पक्ष में और 126 सांसदों ने विरोध में वोट डाले। कुल 333 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। प्रस्ताव पास होने के बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान संशोधन विधेयक पेश किया।
इस विधेयक के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव है, जिसमें राज्यों के लिए लगभग 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में कहा कि यह बदलाव देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक कदम है। गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारतीय राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा और परिसीमन जनसंख्या के आधार पर निष्पक्ष तरीके से किया जाएगा।
विपक्षी दलों कांग्रेस, DMK, SP आदि ने बिल का जमकर विरोध किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन के नाम पर उत्तर-दक्षिण असंतुलन पैदा करना चाहती है। विपक्ष का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिण के राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर के राज्यों को फायदा होगा।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बिल संविधान को “हाइजैक” करने की कोशिश है। सपा सांसदों ने मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा उठाया, जिस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है।
बिल पेश होने की अनुमति मिलने के बाद अब आज विस्तृत चर्चा और अंतिम वोटिंग होने की संभावना है। अगर बिल दोनों सदनों से पास हो जाता है तो 1976 के बाद लोकसभा सीटों में यह सबसे बड़ा विस्तार होगा, जो 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता खोलेगा।