आदिवासी परंपरा पर खतरे का आरोप, हड़गड़ी स्थल बचाने को ग्रामीणों ने डीसी से लगाई गुहार, झारखंड जगुआर कैंप विस्तार का विरोध

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रांची, 5 अप्रैल 2026: कांके प्रखंड के मौजा-टेण्डर में स्थित हड़गड़ी स्थल पर प्रस्तावित झारखंड जगुआर कैंप के विस्तार को लेकर आदिवासी समाज में गहरा असंतोष है। स्थानीय ग्रामीणों और सरना समिति के सदस्यों ने शनिवार को जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और हड़गड़ी स्थल को बचाने की गुहार लगाई।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह भूमि मुंडा जनजाति सहित आदिवासी समाज की सदियों पुरानी आस्था और परंपरा से जुड़ी हुई है। यहां वर्षों से पूर्वजों की स्मृति में हड़गड़ी (ससंदिरी) की पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक गतिविधियां और सामाजिक आयोजन होते रहे हैं। कैंप विस्तार से इस सांस्कृतिक विरासत पर खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है।

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, वार्ड पार्षद अमित मिंज सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने डीसी को बताया कि हड़गड़ी सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों के सम्मान और सामूहिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने मांग की कि कैंप के लिए किसी अन्य वैकल्पिक जगह का चयन किया जाए, ताकि आस्था का केंद्र सुरक्षित रहे।

डीसी मंजूनाथ भजन्त्री ने ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए आश्वासन दिया कि प्रशासन मामले पर गंभीरता से विचार करेगा और आदिवासी समाज की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल ने सरहुल पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए जिला प्रशासन को धन्यवाद भी दिया।

यह मामला झारखंड में आदिवासी सांस्कृतिक स्थलों और विकास कार्यों के बीच संतुलन की चुनौती को एक बार फिर उजागर करता है। स्थानीय आदिवासी संगठन आगे भी इस मुद्दे पर नजर रखे हुए हैं। प्रशासन यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करता है तो विवाद शांत हो सकता है, अन्यथा तनाव बढ़ने की आशंका है।