पटना, 16 मार्च 2026: बिहार विधानसभा में आज हुए राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सभी पांच सीटों पर विजय हासिल की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए के सभी उम्मीदवारों ने निर्विरोध से लेकर निर्णायक अंतर से जीत दर्ज की, जबकि महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) को एक भी सीट नहीं मिल सकी। यह परिणाम बिहार की राजनीति में एनडीए की मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित करता है।
मतदान के दौरान एनडीए के सभी 202 विधायकों ने एकजुट होकर वोट डाले, जबकि महागठबंधन के मात्र 37 विधायक ही मतदान में शामिल हुए। कांग्रेस के कई विधायकों के अनुपस्थित रहने और कुछ क्रॉस-वोटिंग की आशंकाओं के बीच एनडीए ने पांचवीं सीट भी आसानी से अपने खाते में डाल ली। राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए आवश्यक 41 प्राथमिक वोट एनडीए के चार उम्मीदवारों को सहजता से मिले, जबकि पांचवें उम्मीदवार के लिए सेकंड प्रेफरेंस वोटों से निर्णायक बढ़त बनी।
विजयी उम्मीदवारों की सूची:
• नीतीश कुमार (जदयू) – मुख्यमंत्री की राज्यसभा एंट्री तय।
• नितिन नवीन (बीजेपी) – प्रदेश अध्यक्ष की जीत।
• रामनाथ ठाकुर (जदयू) – पुनः निर्वाचित।
• उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) – सहयोगी दल को प्रतिनिधित्व।
• शिवेश कुमार (एनडीए समर्थित) – पांचवीं सीट पर निर्णायक जीत।
एनडीए नेताओं ने इस जीत को “जनादेश की पुष्टि” करार दिया। जदयू के संजय झा ने कहा, “हमारी एकजुटता और विचारधारा की जीत है। बिहार की जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है।” वहीं, बीजेपी नेताओं ने इसे “महागठबंधन के पतन” का प्रमाण बताया।
महागठबंधन नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका है। आरजेडी के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को भी हार का सामना करना पड़ा। महागठबंधन के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति और गठबंधन में आंतरिक कलह ने स्थिति और जटिल बना दी।
यह जीत पिछले साल के विधानसभा चुनाव में एनडीए की 202 सीटों वाली भारी बहुमत के बाद आई है, जिससे राज्य में उनकी सरकार मजबूत हुई। राज्यसभा में बिहार से एनडीए का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, जबकि आरजेडी-कांग्रेस का प्रभाव घटेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए की निरंतर बढ़ती ताकत को दर्शाता है, और महागठबंधन के लिए अब संगठनात्मक सुधार की जरूरत है। बिहार की सियासत में एनडीए का दौर जारी रहने के संकेत मिले हैं।