झारखंड में शराबबंदी पर तीखी बहस, जयराम महतो बोले- गुरुजी का सपना पूरा हो, योगेंद्र प्रसाद ने बोले- केंद्र 2 लाख करोड़ दे तो लागू करेंगे बिहार मॉडल

Spread the News

रांची, 15 मार्च 2026: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में शराबबंदी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम कुमार महतो ने कटौती प्रस्ताव के दौरान राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की जोरदार मांग की। उन्होंने इसे झारखंड आंदोलन के प्रणेता और ‘गुरुजी’ के सपने से जोड़ते हुए कहा, “गुरुजी की शराबबंदी का सपना पूरा हो। शराब मुक्त झारखंड ही सच्चा विकास का आधार बनेगा।”

जयराम महतो ने सदन में भावुक होते हुए कहा कि शराब से परिवार बर्बाद हो रहे हैं, युवा पीढ़ी नष्ट हो रही है और समाज में अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने बिहार के उदाहरण का हवाला देते हुए मांग की कि झारखंड भी बिहार की तरह सख्त शराबबंदी लागू करे।

इस पर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने तीखा जवाब देते हुए कहा, “अगर केंद्र सरकार झारखंड का बकाया दो लाख करोड़ रुपये तुरंत लौटा दे, तो हम भी बिहार की तर्ज पर पूर्ण शराबबंदी लागू करने को तैयार हैं।” मंत्री का यह बयान व्यंग्य से भरा था, क्योंकि शराबबंदी से राज्य को उत्पाद शुल्क के रूप में भारी राजस्व का नुकसान होता है।

मंत्री ने आगे कहा, “बिहार में शराबबंदी से सालाना हजारों करोड़ का नुकसान हो रहा है। झारखंड जैसे छोटे राज्य के लिए यह राजस्व छोड़ना आसान नहीं। केंद्र अगर बकाया राशि दे दे, तो हम विचार करेंगे।”

यह बहस विधानसभा में काफी देर तक चली, जिसमें विपक्ष ने भी सरकार पर शराब के जरिए राजस्व कमाने का आरोप लगाया। जयराम महतो ने कहा कि सामाजिक सुधार से राजस्व का नुकसान भरपाई हो सकता है, लेकिन सरकार आर्थिक हानि का रोना रो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में शराबबंदी लागू होने पर राज्य का वार्षिक उत्पाद शुल्क राजस्व (लगभग 4-5 हजार करोड़) पूरी तरह प्रभावित होगा, जबकि केंद्र से कोई मुआवजा मिलने की संभावना न के बराबर है। यह घटना राज्य में शराबबंदी को लेकर राजनीतिक बहस को नई हवा दे रही है, खासकर बिहार के अनुभव के संदर्भ में जहां शराबबंदी 2016 से लागू है लेकिन तस्करी और जहरीली शराब की मौतें जारी हैं।