रांची में गैस संकट ने बढ़ाई होटल उद्योग की मुश्किलें, अब चूल्हे पर बन रही पकवान 

Spread the News

रांची, 11 मार्च 2026: वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और सप्लाई चेन की रुकावटों के कारण भारत में कमर्शियल एलपीजी (19 किलो) सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर झारखंड की राजधानी रांची सहित पूरे प्रदेश के होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर पड़ रहा है।

कई होटल संचालकों ने बताया कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने से गैस स्टोव पर खाना बनाना लगभग असंभव हो गया है। मजबूरन वे पुराने पारंपरिक तरीके अपनाने को विवश हैं-लकड़ी या कोयले के चूल्हे पर डिशें तैयार कर ग्राहकों को परोस रहे हैं। कुछ होटलों ने मेन्यू को सीमित कर दिया है, जबकि कई जगहों पर केवल चुनिंदा आइटम ही उपलब्ध हैं।

एक स्थानीय होटल मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पहले जहां 50-60 किलोमीटर दूर से ग्राहक आते थे, अब गैस न होने से हम चूल्हे पर दाल-चावल, रोटी-सब्जी जैसी साधारण डिशें ही बना पा रहे हैं। तंदूर, फ्राई और ग्रेवी वाली डिशें बंद हो गई हैं। स्थिति अगर यही रही तो अगले कुछ दिनों में कई होटल अस्थायी रूप से बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।”

झारखंड में यह समस्या सिर्फ रांची तक सीमित नहीं है-रांची के अलावा अन्य शहरों में भी होटल कारोबारी चिंतित हैं। केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल सप्लाई पर अस्थायी रोक/कटौती लगाई है, जिससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में हाहाकार मच गया है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री को पत्र लिखकर कमर्शियल सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

देशभर में भी यही हाल है- मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, पटना आदि शहरों में होटल बंद होने की आशंका जताई जा रही है। राष्ट्रीय रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया का अनुमान है कि अगर संकट लंबा खिंचा तो लाखों लोगों का रोजगार खतरे में पड़ सकता है।

प्रशासन और तेल कंपनियां स्थिति सुधारने का दावा कर रही हैं, लेकिन फिलहाल होटल वाले चूल्हे की लौ पर ही भरोसा कर रहे हैं। पुरानी यादें ताजा करते हुए, लेकिन भविष्य को लेकर चिंतित।