नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद बिहार CM की दौड़ में संघ के करीबी संजीव चौरसिया की चर्चा जोरो पर

Spread the News

पटना, 9 मार्च 2026: बिहार की राजनीति में तेजी से बदलाव की हलचल मची हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, जिसके बाद उनकी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की संभावना मजबूत हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल के पहले सप्ताह में नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं और एनडीए विधायक दल की बैठक में नया मुख्यमंत्री चुना जाएगा।

इस बार मुख्यमंत्री पद भाजपा से आने की चर्चा सबसे ज्यादा है, क्योंकि एनडीए में भाजपा की मजबूत स्थिति है। पिछले कई दशकों में बिहार को पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिल सकता है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई नाम सामने आए हैं, लेकिन पटना के दीघा विधानसभा से भाजपा विधायक डॉ. संजीव चौरसिया का नाम खास तौर पर चर्चा में है।

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की पुष्टि के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर संजीव चौरसिया को “चौंकाने वाला विकल्प” या “सरप्राइज चेहरा” बताया जा रहा है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में उनका नाम सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, दिलीप जायसवाल और विजय कुमार सिन्हा जैसे दिग्गजों के साथ लिया जा रहा है।

डॉ. संजीव चौरसिया पटना के दीघा से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। वे भाजपा बिहार इकाई के पूर्व प्रदेश महामंत्री हैं और संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं। पनवारी EBC-अति पिछड़ा वर्ग समुदाय से आने के कारण वे सामाजिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। उनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल रह चुके हैं।

संजीव चौरसिया को पढ़े-लिखे, विवादों से दूर और सादगीपूर्ण छवि वाले नेता के रूप में जाना जाता है। कई कार्यकर्ता उन्हें “डिजर्विंग” और “बेदाग” बता रहे हैं। हालांकि, सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को देखा जा रहा है, जिनके पास प्रशासनिक अनुभव और नीतीश कुमार से करीबी संबंध हैं।

अन्य नामों में केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय, मंत्री दिलीप जायसवाल और उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा शामिल हैं। भाजपा हाईकमान अंतिम फैसला लेगा, जिसमें जातीय समीकरण, संगठनात्मक मजबूती और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति अहम होगी।

नीतीश कुमार ने कहा है कि नई सरकार को उनका पूरा सहयोग मिलेगा। पटना की सड़कों और राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। क्या बिहार को नया चेहरा मिलेगा, या कोई अनुभवी नेता कमान संभालेगा- यह सस्पेंस अभी बरकरार है।