झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर महागठबंधन में खुली रार, झामुमो ने दोनों पर ठोका दावा

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रांची, 8 मार्च 2026: झारखंड की सत्तारूढ़ महागठबंधन में राज्यसभा चुनाव को लेकर तनाव बढ़ गया है। आगामी मई-जून में होने वाले चुनाव में खाली हो रही दो सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दोनों पर अपना मजबूत दावा ठोक दिया है, जबकि कांग्रेस कम से कम एक सीट पर अड़ी हुई है। इस खींचतान से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।

झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने स्पष्ट कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि दोनों सीटें झामुमो के खाते में रहें। उन्होंने कहा, “हमारी व्यक्तिगत इच्छा है कि राज्यसभा की दोनों सीटें झामुमो को मिलें। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सहयोगी दलों से चर्चा के बाद फैसला होगा, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि गठबंधन के साथी ‘बड़े दिल’ से हमारा साथ देंगे।” पांडेय ने यह भी जताया कि पार्टी शिबू सोरेन की सीट पर उनके परिवार के किसी सदस्य या करीबी को उतार सकती है।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने दो में से कम से कम एक सीट पर अपना दावा पेश किया है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा कि गठबंधन में कांग्रेस अहम भूमिका निभा रही है, इसलिए स्वाभाविक रूप से एक सीट पर पार्टी की दावेदारी बनती है। उन्होंने संकेत दिया कि इस बार “समझौता” नहीं, बल्कि हिस्सेदारी का हक मांगा जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि पिछले चुनावों में पार्टी ने झामुमो को समर्थन दिया, अब बारी उसकी है।

ये दोनों सीटें इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि एक सीट ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के निधन के बाद पहले से खाली है, जबकि दूसरी पर भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है। झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है, जिससे दोनों सीटें जीतना आसान माना जा रहा है, लेकिन आंतरिक कलह से समीकरण बिगड़ सकते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भाकपा (माले) और RJD जैसे छोटे सहयोगियों के बिना पूर्ण समर्थन मुश्किल हो सकता है।

विपक्षी भाजपा फिलहाल इस विवाद पर चुप है, लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी गठबंधन की इस कमजोरी का फायदा उठाने की रणनीति बना रही है। नगर निकाय चुनावों में भी गठबंधन में तालमेल की कमी दिखी थी, जिससे यह रार और गहरी हो गई है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि हेमंत सोरेन को जल्द ही उच्च स्तर पर बातचीत करनी होगी, वरना राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में दरार गहरा सकती है। अंतिम फैसला गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के बीच होगा, लेकिन अभी सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र यही बना हुआ है।