झारखंड में बिजली महंगाई पर जनता का गुस्सा: 59% बढ़ोतरी प्रस्ताव का जनसुनवाई में तीखा विरोध, पहले सुधारें व्यवस्था की मांग

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रांची, 7 मार्च 2026: झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में औसतन 59% तक (कुछ श्रेणियों में 60% तक) की भारी बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) द्वारा आयोजित जनसुनवाई पूरी हो गई है। विभिन्न शहरों जैसे रांची, धनबाद, चाईबासा, दुमका और डाल्टनगंज में फरवरी-मार्च में चली इन सुनवाइयों में उपभोक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने प्रस्ताव का जमकर विरोध किया।

JBVNL ने JSERC के समक्ष दाखिल पिटीशन में दावा किया है कि बढ़ती पावर खरीद लागत, उच्च वितरण हानि, पुरानी देनदारियां और नेटवर्क मजबूती के लिए अतिरिक्त खर्च को कवर करने के लिए यह बढ़ोतरी जरूरी है। प्रस्ताव के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं की दर ₹6.85 से बढ़ाकर ₹10.30 प्रति यूनिट, औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए ₹9.10 प्रति यूनिट और किसानों की सिंचाई दर ₹5.30 से बढ़ाकर ₹9-10 प्रति यूनिट तक करने का सुझाव दिया गया है।

जनसुनवाई के दौरान सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री सहित कई संगठनों ने कहा कि राज्य में पहले से ही बिजली महंगी और अनियमित है। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि JBVNL की अक्षमता और उच्च वितरण हानि का बोझ आम जनता पर क्यों डाला जा रहा है? उन्होंने मांग की कि पहले मीटरिंग सुधार, बिजली चोरी रोकना, सप्लाई नियमित करना और तकनीकी दक्षता बढ़ाना चाहिए, फिर दरें बढ़ाई जाएं। धनबाद की सुनवाई में इसे “जनता की कमर तोड़ने वाला फैसला” करार दिया गया।

उद्योग जगत ने चेतावनी दी कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से राज्य में निवेश प्रभावित होगा और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। कई प्रतिनिधियों ने कहा, “पहले व्यवस्था सुधारें, फिर टैरिफ बढ़ाएं।”

JSERC अब सभी आपत्तियां, सुझाव और JBVNL की प्रतिक्रियाओं पर विचार कर अंतिम टैरिफ ऑर्डर जारी करेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतिम फैसला मार्च अंत तक आ सकता है और नई दरें अप्रैल 2026 से लागू हो सकती हैं। हालांकि, विरोध की तीव्रता को देखते हुए आयोग संतुलित फैसला ले सकता है, जिसमें बढ़ोतरी को कम किया जा सकता है या चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। उपभोक्ता संगठनों ने आह्वान किया है कि अगर बढ़ोतरी मंजूर हुई तो विरोध तेज होगा।