पटना में बढ़ा सियासी तापमान: नीतीश के समर्थन में सड़क पर जेडीयू कार्यकर्ता, पुलिस छावनी बना CM हाउस

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पटना, 05 मार्च: पटना में राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव में नामांकन दाखिल करने और संभवतः मुख्यमंत्री पद छोड़ने की खबरों ने जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। बुधवार शाम से ही सैकड़ों जेडीयू कार्यकर्ता और युवा नेता सीएम आवास 1 अणे मार्ग के बाहर जमा हो गए हैं। वे नीतीश कुमार के मजबूत समर्थन में नारे लगा रहे हैं और किसी भी तरह के नेतृत्व परिवर्तन का कड़ा विरोध कर रहे हैं।

कार्यकर्ताओं ने जोर-जोर से नारे लगाए- “नीतीश कुमार जिंदाबाद!”, “दूसरा मुख्यमंत्री कतई मंजूर नहीं!”, “नीतीश को दिल्ली मत भेजो!” और “बिहार का भविष्य नीतीश के साथ!”। कई कार्यकर्ता भावुक होकर रोते हुए दिखे। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने की साजिश रची जा रही है, जिससे बिहार की जनता और पार्टी कार्यकर्ता कभी नहीं मानेंगे। एक युवा कार्यकर्ता ने कहा कि अगर नीतीश को हटाया गया तो पूरे बिहार में बड़ा आंदोलन शुरू हो जाएगा और महिलाएं भी सड़कों पर उतर आएंगी।

सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सीएम हाउस के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। दोनों मुख्य गेटों पर पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन फोर्स की टीमें और बैरिकेडिंग लगाई गई है। पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। आवागमन पर सख्ती बरती जा रही है और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए हाई अलर्ट जारी है।

यह सब राज्यसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है। खबरों के अनुसार, नीतीश कुमार गुरुवार 5 मार्च 2026 को पटना में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। उनके साथ जेडीयू से रामनाथ ठाकुर और भाजपा से नितिन नवीन जैसे उम्मीदवार भी नामांकन भरेंगे। चुनाव 16 मार्च को होने हैं। नामांकन के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे एनडीए में सत्ता समीकरण बदल सकता है। भाजपा का कोई नेता बिहार का नया मुख्यमंत्री बन सकता है, जबकि जेडीयू को 1-2 डिप्टी सीएम पद मिलने की संभावना जताई जा रही है। नीतीश के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री और डिप्टी सीएम बनने की भी चर्चा जोरों पर है।

जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता अभी नीतीश के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा और बेचैनी साफ नजर आ रही है। आने वाले घंटों और दिनों में यह सियासी ड्रामा और तेज हो सकता है। बिहार की राजनीति में यह नया मोड़ 2025 विधानसभा चुनावों के बाद बनी एनडीए सरकार के लिए बड़ा परीक्षण साबित हो सकता है।