नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं में कुछ विषयों के प्रश्न-पत्रों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि कक्षा 10 के गणित और कक्षा 12 के भौतिकी के पेपर में आईआईटी-जेईई मेन और एडवांस्ड स्तर के कठिन सवाल पूछे गए, जो एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से काफी बाहर थे। अलग-अलग सेट्स में कठिनाई का स्तर असमान होने से छात्रों में असमानता की भावना बढ़ गई है।
इस मुद्दे पर शिक्षक प्रशांत किराड़ ने सीबीएसई के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने वायरल वीडियो में आरोप लगाया कि कुछ सेट्स में सवाल आसान थे, जबकि अन्य में जेईई स्तर के एमसीक्यू और एडवांस्ड प्रश्न थे। इससे छात्रों की मेहनत पर असर पड़ रहा है, क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं में जेईई जैसा नॉर्मलाइजेशन सिस्टम नहीं है। किराड़ ने मांग की है कि सीबीएसई सभी सेट्स में कठिनाई का स्तर एक समान रखे, कठिन सेट्स वाले छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए जाएं और मूल्यांकन में उदारता बरती जाए।
कक्षा 10 के बेसिक मैथ्स पेपर को लेकर भी छात्रों ने शिकायत की कि पेपर बहुत लंबा और कठिन था। कुछ सेट्स में 27 पेज तक के प्रश्न थे, जबकि समय केवल 3 घंटे। छात्रों ने इसे यूपीएससी या जेईई स्तर का बताया। ऑनलाइन शिक्षक रितिक मिश्रा ने भी कक्षा 10 मैथ्स पेपर के लिए अलग से PIL दायर करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र एनसीईआरटी से पढ़ते हैं, लेकिन पेपर का स्तर आईआईटी जैसा था, जिससे मेहनती छात्रों को नुकसान हुआ।
सीबीएसई की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। छात्र सोशल मीडिया पर #CBSEFairness और #GraceMarksForCBSE जैसे हैशटैग के साथ अभियान चला रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोर्ट में सुनवाई हुई तो बोर्ड को प्रश्न-पत्र सेटिंग प्रक्रिया पर जवाब देना पड़ सकता है।
यह विवाद सीबीएसई की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जहां 43 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हैं। आगे की परीक्षाओं में छात्रों की मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। सीबीएसई से उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट करेगा।