झारखंड में 34 फॉर्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द, 36 से मांगा स्पष्टीकरण

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रांची, 08 जनवरी 2026: झारखंड में डिप्लोमा इन फार्मेसी कोर्स संचालित करने वाले कई संस्थानों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई की तैयारी की है। विभागीय जांच में 34 फॉर्मेसी कॉलेजों में गंभीर उल्लंघन पाए गए हैं, जिनमें अपनी जमीन-भवन न होना, टीचिंग व नॉन-टीचिंग स्टाफ की कमी और सरकारी एनओसी न लेना प्रमुख है। इन संस्थानों का लेटर ऑफ कंसेंट निरस्त करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। साथ ही, 2025-26 सत्र में नए नामांकन पर रोक की अनुशंसा फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजी जाएगी।

इसके अलावा, 36 अन्य संस्थानों में स्टाफ व इंफ्रास्ट्रक्चर की आंशिक कमी मिली है। इनमें भी एनओसी नहीं ली गई है। विभाग ने इनसे स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। बिना वैध एनओसी वाले संस्थानों के छात्रों का परीक्षा पंजीकरण रोका जा सकता है। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया मानकों और सरकारी प्रावधानों का पालन न करने वाले किसी भी कॉलेज को संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी।

जांच की शुरुआत पिछले साल अगस्त में हुई थी, जब अपर मुख्य सचिव ने उप सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमिटी गठित की। कमिटी ने राज्य के 71 फॉर्मेसी संस्थानों की जांच की और व्यापक अनियमितताएं उजागर कीं। रिपोर्ट में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों पर सवाल उठाते हुए परीक्षा समिति से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

रांची-खूंटी क्षेत्र में 10 कॉलेजों का कंसेंट रद्द होगा, जिनमें विद्यापति कॉलेज ऑफ हेल्थ एंड प्रोफेशनल एजुकेशन (इरबा), जसलोक कॉलेज ऑफ फार्मेसी (सिमलिया), बाजरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी (हेहल) आदि शामिल हैं। स्पष्टीकरण मांगने वालों में फ्लोरेंस कॉलेज ऑफ फार्मेसी (इरबा), शाइन अब्दुर रज्जाक अंसारी इंस्टीट्यूट (इरबा), मनरखन महतो फार्मेसी कॉलेज (केदल) समेत 23 संस्थान हैं।

यह कार्रवाई फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। छात्रों से अपील है कि एडमिशन से पहले फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया वेबसाइट पर संस्थान की स्थिति जरूर जांचें।