नई दिल्ली, 22 अक्टूबर: देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शामिल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक साइबर हमले के बाद बैंक के करीब 3,900 ग्राहकों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड डार्क वेब पर पाए गए हैं। लीक हुए डेटा में ग्राहकों के नाम, फोन नंबर, पहचान संबंधी जानकारी और ऋण से जुड़े विवरण शामिल बताए जा रहे हैं।
इस घटना से बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा और ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। व्यक्तिगत और वित्तीय विवरणों के गलत हाथों में पहुंचने से प्रभावित ग्राहकों को फर्जी फोन कॉल, धोखाधड़ी वाले संदेश, पहचान के दुरुपयोग और ऋण के नाम पर ठगी जैसी आशंकाओं का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसी घटनाओं के मद्देनजर ग्राहकों को अनजान फोन कॉल, संदिग्ध लिंक और बैंक अधिकारी बनकर जानकारी मांगने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। बैंक खाते से संबंधित ओटीपी, एटीएम या डेबिट कार्ड का पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि किसी ग्राहक को खाते में संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है या उसके साथ वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे तत्काल बैंक के आधिकारिक माध्यम से शिकायत करनी चाहिए। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
हालांकि, प्रभावित ग्राहकों की सटीक संख्या, डेटा लीक के स्रोत और बैंक की ओर से उठाए गए सुरक्षा कदमों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। ग्राहकों को इस मामले में केवल बैंक के आधिकारिक बयानों और प्रमाणित सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।
एसबीआई के अनुसार, 16 अक्टूबर को बैंक को थ्रेट इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता, डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) की ओर से संभावित डेटा लीक को लेकर अलर्ट मिला था। प्रारंभिक जांच में डार्क वेब पर उपलब्ध करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जिनमें 3,897 ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी की पहचान हुई। मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से संबद्ध स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है।
बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस घटना से उसके मुख्य बैंकिंग कार्यों, वित्तीय प्रदर्शन और कारोबारी निरंतरता पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, डेटा लीक का वास्तविक स्रोत, प्रभावित जानकारी की प्रामाणिकता और ग्राहकों पर संभावित प्रभाव का आकलन अभी जांच का विषय है।
बैंक ने ग्राहकों से आग्रह की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, एटीएम पिन या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड न बताएं। बैंक कर्मचारी बनकर फोन करने वालों से सतर्क रहें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।