रांची, 05 अक्टूबर: झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव एक बार फिर पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ उनकी कथित बयानबाजी को लेकर कांग्रेस के भीतर नाराजगी बढ़ी है। इस मामले में पार्टी की अनुशासन समिति उनके खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से भी कांग्रेस नेतृत्व से योगेंद्र साव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
बताया जाता है कि हजारीबाग में दिए गए योगेंद्र साव के एक बयान को लेकर कांग्रेस ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पार्टी ने उनसे अपने बयान को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि गठबंधन सरकार में शामिल दलों के शीर्ष नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी से गठबंधन की एकजुटता प्रभावित हो सकती है।
इससे पहले भी योगेंद्र साव को पार्टी विरोधी बयानबाजी के आरोप में कांग्रेस ने कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। मार्च 2026 में उन्हें तीन वर्ष के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया गया था। हालांकि करीब तीन महीने बाद जून में उनका निष्कासन रद्द कर उन्हें पार्टी में वापस ले लिया गया था।
अब दोबारा विवाद सामने आने के बाद कांग्रेस में उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। झामुमो के दबाव और गठबंधन की राजनीतिक परिस्थितियों के बीच कांग्रेस नेतृत्व का अगला फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी की अनुशासन समिति और शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।