खनन से झारखंड को 9,746 करोड़ रुपये का राजस्व, कोयला बना सबसे बड़ा स्रोत

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रांची, 02 सितंबर: झारखंड सरकार को चालू वित्त वर्ष 2026-27 में खनन क्षेत्र से अब तक 9,746 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। खान एवं भूतत्व विभाग के 31 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इसमें 4,734.28 करोड़ रुपये खनिज सेस तथा करीब 5,012 करोड़ रुपये रॉयल्टी और अन्य मदों से प्राप्त हुए हैं।

राजस्व संग्रह में कोयला क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। खनिज सेस के रूप में प्राप्त 4,734.28 करोड़ रुपये में अकेले कोयले से 4,017.47 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा लौह अयस्क से 601.19 करोड़, बॉक्साइट से 103.01 करोड़, यूरेनियम से 6.57 करोड़, कॉपर-लेड से 5.83 करोड़, सोना अयस्क से 20 लाख और ग्रेफाइट से करीब एक लाख रुपये का सेस प्राप्त हुआ है।

कोयला खनन से सेस संग्रह में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) सबसे आगे रही। CCL से राज्य सरकार को 1,660.89 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बाद BCCL से 648.31 करोड़, NTPC Mining से 517.55 करोड़, ECL से 412.94 करोड़ और West Bengal Power Development Corporation से 371.25 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

विभाग के आंकड़ों के मुताबिक रॉयल्टी के मद में राज्य को 4,338.87 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा MMDR एक्ट के तहत परमिट में अतिरिक्त राशि से 588.59 करोड़, मैनेजमेंट फीस से 14.33 करोड़, अपफ्रंट पेमेंट से 23.18 करोड़, पेनल्टी फीस से 12.68 करोड़ तथा अन्य विभिन्न मदों से भी राजस्व प्राप्त हुआ है।

लौह अयस्क से मिले सेस में SAIL और टाटा स्टील का भी बड़ा योगदान रहा। कुल 601.19 करोड़ रुपये के लौह अयस्क सेस में SAIL से 311.20 करोड़ और टाटा स्टील से 289.15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। आंकड़े बताते हैं कि झारखंड की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व में खनन क्षेत्र की भूमिका अब भी बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।