हाईकोर्ट की रोक के बाद मरांडी ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

Spread the News

रांची,21 अगस्त: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के प्रति सरकार की नीयत ठीक नहीं होने की आशंका उन्होंने पहले ही दिन व्यक्त की थी।

मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरकार ने छात्र आंदोलन को समाप्त करने के लिए जल्दबाजी में परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने उसी समय आशंका जताई थी कि सरकार का यह निर्णय कानूनी कसौटी पर टिक नहीं पाएगा और अदालत से इस पर रोक लग सकती है।

गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्तियों को रद्द किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश से नियुक्त अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है।

मरांडी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सरकार को परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायत थी, तो पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि परीक्षा रद्द करने जैसे फैसले से उन अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति हासिल की है।

इससे पहले भी मरांडी जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग करते रहे हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है।

हाईकोर्ट की रोक के बाद अब सरकार के परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। वहीं, इस मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।