नियुक्ति रद्द होने के विरोध में JSSC-CGL कर्मियों का आक्रोश मार्च, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

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रांची, 20 अगस्त: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के विरोध में चयनित एवं नवनियुक्त कर्मियों का आंदोलन तेज हो गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में JSSC-CGL से नियुक्त कर्मियों और सफल अभ्यर्थियों ने रांची में आक्रोश मार्च निकाला और सरकार से नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक मार्च किया। इस दौरान हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के निर्णय के खिलाफ नारेबाजी की गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में सफलता हासिल की और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई लोगों को सरकारी विभागों में नियुक्ति भी मिल चुकी है।

कर्मियों का तर्क है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन कथित गड़बड़ी के लिए उन अभ्यर्थियों को दंडित नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नियुक्ति रद्द होने से उनकी नौकरी, आर्थिक स्थिरता और परिवार का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

इससे पहले 17 अगस्त से कई नियुक्त कर्मी झारखंड मंत्रालय के बाहर धरना दे रहे हैं। बुधवार को भी उनका विरोध जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि उनकी बात सुनी जाए और नियुक्तियों को सुरक्षित रखते हुए व्यक्तिगत स्तर पर जांच की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थियों या अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।

दरअसल, झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने और जांच कराने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद जहां परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने इसे अपनी बड़ी मांगों की पूर्ति बताया है, वहीं पहले से चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नियुक्त कर्मियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि सरकार से समाधान नहीं मिलने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जा सकता है।