राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन, अंबेडकर के आर्थिक चिंतन पर हुआ मंथन

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बाबा साहेब का जीवन युवाओं के लिए संघर्ष, शिक्षा और आत्मसम्मान की प्रेरणा है- रामदास अठावले

रामगढ़, 27 जून: राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में शनिवार को “आर्थिक असमानता एवं बेरोजगारी के संदर्भ में डॉ. भीमराव अंबेडकर का समग्र दृष्टिकोण” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लेकर डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विचारों पर गहन मंथन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति रंगनाथ पांडेय (गोमती नगर, लखनऊ), महाकौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ. आर.सी. मिश्रा तथा नेशनल वॉयस प्रेसीडेंस महिला अघाड़ी की डॉ. माई देशमुख उपस्थित रहीं। संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी.एन. साह ने की।

मुख्य अतिथि रामदास अठावले ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन युवाओं के लिए संघर्ष, शिक्षा और आत्मसम्मान की प्रेरणा है। उनका सपना केवल सामाजिक समानता तक सीमित नहीं था, बल्कि आर्थिक न्याय, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण भी उनकी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने युवाओं से बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

न्यायमूर्ति रंगनाथ पांडेय ने कहा कि ऐसी राष्ट्रीय संगोष्ठियां सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श का मंच प्रदान करती हैं। डॉ. आर.सी. मिश्रा ने डॉ. अंबेडकर के आर्थिक चिंतन, सामाजिक न्याय, समान अवसर, रोजगार सृजन एवं समावेशी विकास के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलाधिपति बी.एन. साह ने कहा कि “शिक्षा केवल सफलता का मार्ग नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से डॉ. अंबेडकर के विचारों को अपनाकर समाज के विकास में योगदान देने की अपील की।”

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कुलगीत, गीत-संगीत एवं सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया तथा संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों, शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन किया और कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठियां ज्ञान, नवाचार एवं सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम हैं।

तकनीकी सत्र में शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए, जिन पर विषय विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलाधिपति की धर्मपत्नी फूलमती देवी, विश्वविद्यालय की सचिव प्रियंका कुमारी, कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि, कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, राधा गोविन्द स्कूल के प्राचार्य डॉ. सुमित मोहंती, इंटर कॉलेज की प्राचार्य सोमा पाण्डेय, समाजसेवी सी.पी. सनतन, मीडिया प्रभारी डॉ. संजय सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजना पाण्डेय, डॉ. अमरेश पाण्डेय एवं डॉ. पूनम कुमारी ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल ने किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रीय संगोष्ठी का गरिमापूर्ण समापन हुआ।