पासपोर्ट पर केंद्र के बयान से सियासी घमासान, JMM ने उठाए नागरिकता और SIR पर सवाल

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रांची/नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि केवल एक यात्रा दस्तावेज है, देश में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में इसे नागरिकता से जुड़े प्रमुख दस्तावेजों में क्यों स्वीकार किया गया है।

झामुमो ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि केंद्र सरकार की दो अलग-अलग संस्थाओं के रुख में विरोधाभास दिखाई दे रहा है। पार्टी ने पूछा कि एक ओर विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को केवल यात्रा दस्तावेज बता रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनावी सत्यापन प्रक्रिया में इसे नागरिकता से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। पार्टी ने सरकार से इस विरोधाभास पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

दरअसल, 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है और इसे नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के बाद विपक्षी दलों और कई सार्वजनिक हस्तियों ने सवाल उठाए कि यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज मान्य होगा।

विवाद बढ़ने पर सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि यह कोई नई नीति नहीं है। सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 तथा पूर्व के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कानून के अनुसार पासपोर्ट का प्राथमिक उद्देश्य यात्रा दस्तावेज के रूप में कार्य करना है और नागरिकता का निर्धारण अलग कानूनी प्रावधानों के तहत किया जाता है।

इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेर रहा है। विभिन्न विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि यदि पासपोर्ट, आधार और अन्य दस्तावेज नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो आम नागरिक अपनी नागरिकता किस आधार पर सिद्ध करेगा। वहीं सरकार का कहना है कि पासपोर्ट को लेकर उसका रुख पहले से ही कानून के अनुरूप है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।