राधा गोविंद विश्वविद्यालय में नशा मुक्ति का संदेश, युवाओं ने ली ड्रग्स से दूर रहने की शपथ

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रामगढ़, 20 जून। राधा गोविंद विश्वविद्यालय, रामगढ़ के फार्मेसी संकाय द्वारा “एंटी-नारकोटिक्स अवेयरनेस कैंपेन-2026” के तहत शुक्रवार को जागरूकता संगोष्ठी एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “नशा मुक्त भारत अभियान- विकसित भारत की पहचान” रखा गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय राधा देवी एवं स्वर्गीय गोविंद साह को श्रद्धांजलि अर्पित करने तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी.एन. साह, कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि, सचिव प्रियंका कुमारी, कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार एवं प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि झारखंड राज्य सरकार के राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. अमित कुमार ने “मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं उसके सामाजिक प्रभाव” विषय पर व्याख्यान देते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए गंभीर चुनौती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलाधिपति बी.एन. साह ने कहा कि “नशामुक्त युवा ही सशक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

फार्मेसी संकाय के सहायक प्राध्यापक आलोक कुमार ने “मादक पदार्थों के दुरुपयोग : जागरूकता, रोकथाम एवं जिम्मेदारी” विषय पर प्रस्तुति देते हुए नशे के दुष्प्रभावों, स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों तथा सामाजिक दायित्वों की जानकारी दी।

इस दौरान पोस्टर निर्माण, स्लोगन लेखन प्रतियोगिता, विशेषज्ञ व्याख्यान, जागरूकता सत्र एवं नशामुक्ति शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नशीले पदार्थों से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष साई प्रकाश पाणिग्रही ने धन्यवाद ज्ञापन किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने “से नो टू ड्रग्स, से यस टू लाइफ” का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग के सभी शिक्षकों एवं संकाय सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।