पेसा कानून पर बढ़ा तकरार, आदिवासी संगठनों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन; 5 प्रमुख मांगें रखीं

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रांची/रामगढ़, 12 जून: झारखंड में हाल ही में लागू की गई पेसा (PESA) नियमावली को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। विभिन्न आदिवासी एवं पारंपरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला समाहरणालय पहुंचकर उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा और पेसा नियमावली में सुधार समेत पांच प्रमुख मांगें रखीं। संगठनों का आरोप है कि वर्तमान नियमावली पेसा कानून की मूल भावना के अनुरूप नहीं है तथा इससे ग्राम सभाओं और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के अधिकार कमजोर हो रहे हैं।

ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के नेताओं ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समुदायों को जल, जंगल और जमीन पर अधिकार तथा स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन नियमावली के कुछ प्रावधानों पर गंभीर आपत्तियां हैं। उन्होंने सरकार से आदिवासी समाज की भावनाओं के अनुरूप संशोधन करने की मांग की।

संगठनों की प्रमुख 5 मांगें

1. पेसा नियमावली में संशोधन कर ग्राम सभा को अधिक अधिकार दिए जाएं।

2. पारंपरिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को पूर्ण मान्यता मिले।

3. जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य की जाए।

4. नियमावली में स्थानीय भाषाओं और पारंपरिक व्यवस्थाओं को शामिल किया जाए।

5. आदिवासी संगठनों से व्यापक परामर्श के बाद ही नियमों में अंतिम निर्णय लिया जाए।

आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर, राज्य सरकार पेसा नियमावली को आदिवासी स्वशासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन इसके कुछ प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं।

इस मुद्दे को लेकर झारखंड की राजनीति और आदिवासी समाज में बहस लगातार गहराती जा रही है तथा आने वाले दिनों में यह विषय और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।