राहुल गांधी का हमला : ‘इवेंटबाज़ी नहीं, ज़मीन से जुड़ी राजनीति चाहिए’

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भारत को अब ऐसी राजनीति की ज़रूरत है जो इवेंट और दिखावे पर नहीं, बल्कि आम लोगों की ज़िंदगी की सच्चाई से जुड़ी हो। उन्होंने दावा किया कि देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।

गिरती बिक्री, बढ़ती महंगाई

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा कि बीते एक साल में दोपहिया वाहनों की बिक्री में 17 प्रतिशत और कारों की बिक्री में 8.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही मोबाइल फोन बाजार भी सात प्रतिशत तक सिकुड़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में महंगाई, शिक्षा और मकान किराये का बोझ लगातार बढ़ रहा है जबकि आमदनी और आर्थिक सुरक्षा घट रही है। राहुल ने लिखा, “ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि आम आदमी पर पड़ रहे असली दबाव की तस्वीर हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि एक ऐसी समावेशी अर्थव्यवस्था की जरूरत है जो सभी नागरिकों के लिए काम करे, न कि केवल कुछ उद्योगपतियों को ही लाभ पहुंचाए।

विदेश नीति पर भी सवाल

उधर, कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को मिली अहम जिम्मेदारियों को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के संचार प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान को तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष और आतंकवाद निरोधक समिति का उपाध्यक्ष बनाए जाने से भारत की विदेश नीति को गंभीर झटका लगा है।

खेड़ा ने आरोप लगाया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान को आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक से भारी भरकम आर्थिक सहायता मिली और इसके तुरंत बाद उसे संयुक्त राष्ट्र में महत्वपूर्ण पद सौंप दिए गए। उन्होंने इस घटनाक्रम को भारत की कूटनीतिक कमजोरी करार दिया और सवाल किया कि क्या दुनिया अब भी पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन देने को नज़रअंदाज़ करती रहेगी।

कांग्रेस का तंज : क्या यही है विश्वगुरु बनने का रास्ता?

पार्टी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि जिन देशों पर भारत सख्ती की बात करता है, वही देश आज अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में ऊंचे पद पा रहे हैं और भारत मूकदर्शक बना बैठा है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर संसद और जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।