रांची, 4 अक्टूबर 2025: झारखंड में लंबे समय से अटके स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू करने का ऐलान किया है, जिससे 48 नगर निकायों के चुनावों में और देरी की आशंका है। सर्वाइवल ऑफ इंडिजिनस राइट्स आंदोलन की मांगों के बीच यह कदम राज्य सरकार को मुश्किल में डाल सकता है।
SIR आंदोलन, जो 2023 से आदिवासी-ओबीसी अधिकारों के लिए सक्रिय है, 75-80% आरक्षण की मांग कर रहा है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण में 30 वर्ष से अधिक निवास और संपत्ति के आधार पर ‘स्थानीय’ की परिभाषा तय होगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार ने कहा, “यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।” लेकिन विपक्षी दल BJP इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बता रहे हैं, जबकि JMM-कांग्रेस गठबंधन SIR का समर्थन कर रहा है।
दूसरी ओर, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट पूरा कर लिया है। आयोग अध्यक्ष जानकी यादव के मुताबिक, रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी जा रही है और अक्टूबर-नवंबर में चुनाव संभव हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने सितंबर में देरी पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव को तलब किया था, इसे ‘लोकतंत्र का अपमान’ करार दिया। चुनाव न होने से केंद्र का 1,600 करोड़ का अनुदान रुका है, जिससे शहरी विकास ठप है। IAS अधिकारी फिलहाल प्रशासक के रूप में निकाय चला रहे हैं।
राजनीतिक हलचल तेज है। SIR ने रैलियां और धरने आयोजित किए, जबकि विपक्ष ने इसे विधानसभा चुनावों से जोड़ दिया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि SIR पूरा होने पर चुनाव नवंबर-दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 में हो सकते हैं। लेकिन अगर विवाद बढ़ा, तो देरी लंबी खिंच सकती है।