पटना, 27 सितंबर 2025: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की आधिकारिक घोषणा अक्टूबर महीने में होने की संभावना है, जिसके बाद राज्य की सियासी गलियारों में हलचल तेज हो जाएगी। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है, इसलिए चुनावी प्रक्रिया को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए मतदान अक्टूबर के अंत या नवंबर के प्रारंभ में दो या तीन चरणों में आयोजित हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, मतगणना 15 से 20 नवंबर के बीच हो सकती है।
ईसीआई ने अभी तक कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दशहरा (2 अक्टूबर) और दिवाली (19 अक्टूबर) के बीच चुनाव कार्यक्रम जारी किया जा सकता है। बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) जिसमें जनता दल (यूनाइटेड), भारतीय जनता पार्टी, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी और अन्य शामिल हैं, वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन के रूप में मैदान में उतरेगा। वहीं, विपक्षी महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और अन्य दल मजबूत चुनौती पेश करने की तैयारी में जुटे हैं।
राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। बीजेपी ने अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है और एनडीए के प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाई गई है। वहीं, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जिसमें कम से कम 40 सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारे जाएंगे। इसके अलावा, बिहार में कुल 7.64 करोड़ मतदाताओं में से 3.60 करोड़ महिलाएं हैं, जो पिछले तीन चुनावों में पुरुषों से अधिक वोटिंग प्रतिशत दर्ज करा चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिलाओं को 10,000 से 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता की घोषणा ने भी चुनावी बहस को नई दिशा दी है।
चुनाव आयोग ने विशेष मतदाता सूची संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के तहत 1 जुलाई 2025 की अर्हता तिथि पर मतदाता सूची तैयार की है, जिसमें युवा और महिला मतदाताओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिवान जैसे क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों ने भी सियासत को गरमा दिया है, जहां खान ब्रदर्स की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह चुनाव बिहार की विकास, बेरोजगारी और प्रवासन जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। घोषणा के बाद मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो जाएगा, जिससे पार्टियां अपनी गतिविधियां तत्काल समायोजित करेंगी। बिहार की जनता आंखें बिछाए इस ऐतिहासिक चुनाव का इंतजार कर रही है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेगा।